मध्य प्रदेश

हिमाचल: CM सुक्खू का BJP पर निशाना, मेडिकल डिवाइस पार्क और किशाऊ बांध का जिक्र कर क्या बोले?


हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार (19 जून) को राज्य विश्वविद्यालय में आयोजित उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान पूर्व की बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा. मुख्यमंत्री ने मेडिकल डिवाइस पार्क और किशाऊ बांध परियोजना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने प्रदेश के हितों के साथ भारी समझौता किया था. वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए सुक्खू ने स्पष्ट कहा कि वे अब उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लेते हैं.

 करोड़ की जमीन 1 करोड़ में दी- CM सुक्खू

मुख्यमंत्री ने पूर्व बीजेपी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 5000 करोड़ रुपये की बेशकीमती जमीन महज 1 करोड़ रुपये में उद्योगों को सौंप दी.
सुक्खू ने बताया कि मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए केंद्र से 100 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन इसके एवज में उद्योगों को 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन और 3 रुपये प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली देने का समझौता किया गया. मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि वह अपनी सरकार में राज्य की जनता के हितों के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं कर सकते.

किशाऊ बांध परियोजना: प्रदेश को मिली बड़ी जीत

किशाऊ बांध परियोजना पर फैल रही गलत जानकारियों का खंडन करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे वर्तमान सरकार की एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत बताया.

पिछली सरकार की खामी: सुक्खू ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा पर बन रही इस परियोजना (जिसका लाभ दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को भी मिलेगा) में पूर्व सरकार ने बिजली उत्पादन का खर्च वहन करने की सहमति दे दी थी.

वर्तमान सरकार का एक्शन: सत्ता में आते ही उन्होंने इस फैसले पर रोक लगाई और लंबी चर्चा की. इसके परिणामस्वरूप अब इस परियोजना से हिमाचल को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी. साथ ही, 5 साल बाद राज्य को करीब 600 करोड़ रुपये की सालाना कमाई होगी.

जलविद्युत परियोजनाओं की रॉयल्टी पर सरकार का सख्त रुख

जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली रॉयल्टी के मुद्दे पर सीएम सुक्खू ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है और राज्य का स्टैंड क्लियर कर दिया है:

  • 40 साल की अवधि: जो प्रोजेक्ट 40 साल पूरे कर चुके हैं, उन्हें एक्सटेंशन के लिए राज्य को 20 फीसदी रॉयल्टी देनी होगी.
  • 60 साल की अवधि: 60 वर्ष पूरे होने के बाद प्रोजेक्ट पूरी तरह से राज्य सरकार को सौंपना होगा.
  • कर्ज मुक्त प्रोजेक्ट्स: जो प्रोजेक्ट 12% रॉयल्टी पर चल रहे हैं और अब कर्ज मुक्त हो चुके हैं, उनकी रॉयल्टी भी बढ़ाई जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम प्रदेश की भावी युवा पीढ़ी के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है.

विश्वविद्यालय में कंप्यूटर लैब का उद्घाटन और फीस बढ़ोतरी पर बयान

इससे पहले, अपने विश्वविद्यालय के दिनों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने छात्रों के लिए एक नई ‘कंप्यूटर टेस्ट लैब’ (CBT Lab) का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि अब शिमला के छात्रों को प्रतियोगी और अन्य ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा.

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ और ‘इलेक्ट्रिक व्हीकल’ (EV) जैसी भविष्य की तकनीकों पर शोध करने का भी निर्देश दिया. विश्वविद्यालय में 10 साल बाद हुई मामूली फीस बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि चूंकि वह खुद छात्र राजनीति से निकलकर आए हैं, इसलिए वह छात्रों की परेशानी समझते हैं और इस बढ़ोतरी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकते हैं.

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