
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में बेतवा नदी के स्टॉप डैम को पार कर हाई स्कूल जाने वाले बच्चों की परेशानी पर एबीपी न्यूज की खबर के बाद हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया. इसके बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए बंधेरा के मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में तब्दील कर दिया. करीब 10 साल से कररुआ, बहलोट, बंधेरा और इमलिया गांव के बच्चे जान जोखिम में डालकर स्टॉप डैम पार कर पलोह हाई स्कूल जाते थे. अब 9वीं और 10वीं की पढ़ाई बंधेरा के स्कूल में ही शुरू कर दी गई है.
बरसात के दिनों में बच्चों की मुश्किल और बढ़ जाती थी. बेतवा नदी में पानी बढ़ने के साथ स्टॉप डैम पर बहाव तेज हो जाता था. ऐसी स्थिति में बच्चों के लिए नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता था. कई बार स्कूल की ओर से भी बच्चों को स्टॉप डैम पार करके आने से मना कर दिया जाता था. इसके बाद उनके पास 16 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता था.
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ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से गांव में हाई स्कूल खोलने की मांग की जा रही थी. इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन लंबे समय तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला.
एबीपी न्यूज की खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया
बच्चों के इस जोखिम भरे सफर की खबर एबीपी न्यूज पर सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा. हाई कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया. इसके बाद शासन और प्रशासन हरकत में आया और बंधेरा के मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में तब्दील कर दिया गया.
करीब एक सप्ताह पहले ही बंधेरा के स्कूल में 9वीं और 10वीं की पढ़ाई शुरू करने का फैसला लिया गया है. प्रशासन ने आनन-फानन में दोनों कक्षाओं के लिए दो शिक्षकों की नियुक्ति भी कर दी है.
नई कक्षाएं शुरू, लेकिन व्यवस्थाएं अभी अधूरी
बंधेरा के स्कूल में हाई स्कूल की कक्षाएं शुरू होने से बच्चों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है. हालांकि स्कूल में अभी सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी नहीं हैं. शिक्षकों की नियुक्ति के साथ पढ़ाई तो शुरू हो गई है, लेकिन अन्य संसाधनों की जरूरत भी बनी हुई है.
जिन बच्चों को पहले स्टॉप डैम पार करके पलोह जाना पड़ता था, अब उन्हें अपने ही गांव के स्कूल में 9वीं और 10वीं की पढ़ाई करने का मौका मिल रहा है. बच्चों ने बताया कि स्टॉप डैम पार करते समय उन्हें कई बार डर लगता था. खासकर बारिश के दिनों में नदी का पानी बढ़ने पर मुश्किल और ज्यादा हो जाती थी.
सालों तक जोखिम उठाते रहे बच्चे
कररुआ गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित स्टॉप डैम लंबे समय से इन गांवों के बच्चों के लिए स्कूल जाने का रास्ता बना हुआ था. ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार पानी का बहाव बढ़ने के बावजूद बच्चों को मजबूरी में इसी रास्ते से गुजरना पड़ा. बच्चों के स्कूल जाने के बाद अभिभावक उनके सुरक्षित वापस लौटने तक परेशान रहते थे.
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन उनकी मांग पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया. अब प्रशासन ने बंधेरा स्कूल को हाई स्कूल में बदलकर तत्काल राहत तो दी है, लेकिन सवाल यह है कि यह फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया.
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मीडिया में खबर सामने आने और हाई कोर्ट के संज्ञान के बाद जिस तेजी से प्रशासन ने बंधेरा स्कूल को हाई स्कूल में बदलने का फैसला लिया, उससे सवाल खड़ा होता है कि यही कदम पहले क्यों नहीं उठाया गया.
ग्रामीण करीब एक दशक से हाई स्कूल की मांग कर रहे थे. अगर समय रहते बंधेरा में ही 9वीं और 10वीं की पढ़ाई शुरू कर दी जाती, तो बच्चों को इतने वर्षों तक जान जोखिम में डालकर स्टॉप डैम पार करने की जरूरत नहीं पड़ती. अब ग्रामीणों की उम्मीद है कि स्कूल में शिक्षकों के साथ बाकी जरूरी संसाधन भी जल्द उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि बच्चों की पढ़ाई सुरक्षित माहौल में जारी रह सके.