
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक ऐतिहासिक फैसला मानती है. बीजेपी शासित कई राज्यों में इसके लागू होने की संभावनाएं प्रबल हैं. उत्तराखंड में यह कानून लागू हो चुका है. वहीं, मध्य प्रदेश, गुजरात, असम और राजस्थान में भी इसकी प्रक्रिया जारी है. हालांकि, अब विपक्षी दल कांग्रेस ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को ‘काला कानून’ करार दिया है.
दरअसल, मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता विपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया है कि एमपी चुनाव 2028 में सरकार बनने पर वह इस कानून को खत्म कर देंगे. रविवार (30 अगस्त) को भोपाल में विधायक आरिफ मसूद द्वारा आयोजित जंग-ए-आजादी-उलेमा की कुर्बानी कार्यक्रम में भाषण के दौरान उमंग सिंघार ने यह बात कही है.
समान नागरिक संहिता क्या होती है?
बता दें, यूनिफॉर्म सिविल कोडी यानी कि समान नागरिक संहिता ऐसा कानून है, जिसमें अलग-अलग धर्मों के व्यक्तिगत कानून लागू नहीं होते बल्कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, गोद लेने और कुछ अन्य पारिवारिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था चलती है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान संहिता सुनिश्चित करने की कोशिश करने की बात कही गई है. हालांकि, यह संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है.
एमपी में कब पास हुआ था यूसीसी बिल
यूसीसी को लेकर एमपी कांग्रेस नेता के इस बयान से सियासी टकराव तेज हो गया है. दरअसल, बीते 20 जुलाई को मध्य प्रदेश सरकार ने विशेष मंत्रिमंडल बैठक में समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को मंजूरी दी थी. इसके बाद 21 जुलाई को विधानसभा में विधेयक पारित कर दिया गया. बिल के विरोध में सदन में कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया था.
एमपी यूसीसी बिल 2026 में क्या है?
यूसीसी बिल-2026 में पॉलीगैमी यानी एक से ज्यादा विवाह पर रोक, शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, और लिवइन में रह रहे कपल्स को भी रजिस्टर होने का प्रावधान है. वहीं, इन अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने का प्रावधान भी किया गया है.
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