धर्म

14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ, पहले व्रत की पूजा या गणपति स्थापना?


14 सितंबर को सूर्योदय के समय भाद्रपद शुक्ल तृतीया है, जो सुबह 7:06 बजे समाप्त होती है, जबकि गणेश चतुर्थी की तिथि इसके बाद शुरू हो जाएगी. तीज की पूजा तृतीया तिथि में करना शास्त्रसम्मत है.

14 सितंबर को सूर्योदय के समय भाद्रपद शुक्ल तृतीया है, जो सुबह 7:06 बजे समाप्त होती है, जबकि गणेश चतुर्थी की तिथि इसके बाद शुरू हो जाएगी. तीज की पूजा तृतीया तिथि में करना शास्त्रसम्मत है.

पहले किसकी पूजा करें? - हरतालिका तीज की पूजा सुबह के अलावा और रात्रि के चारों प्रहर में भी होती है. चूंकि सुबह तृतीया तिथि जल्द समाप्त हो रही है, ऐसे में  हरतालिका तीज व्रत करने वाली महिलाएं शिव पार्वती का संकल्प लेकर एक बार पूजन कर लें. फिर गणेश स्थापना कर सकते हैं.

पहले किसकी पूजा करें? – हरतालिका तीज की पूजा सुबह के अलावा और रात्रि के चारों प्रहर में भी होती है. चूंकि सुबह तृतीया तिथि जल्द समाप्त हो रही है, ऐसे में हरतालिका तीज व्रत करने वाली महिलाएं शिव पार्वती का संकल्प लेकर एक बार पूजन कर लें. फिर गणेश स्थापना कर सकते हैं.

हरतालिका पूजा का समय क्या है ? - पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को सुबह 6:05 से सुबह 7:06 बजे तक हरतालिका पूजा का मुहूर्त है, शहर के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

हरतालिका पूजा का समय क्या है ? – पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को सुबह 6:05 से सुबह 7:06 बजे तक हरतालिका पूजा का मुहूर्त है, शहर के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

गणपति स्थापना कब करें? -हरतालिका पूजा के बाद गणेश चतुर्थी की मध्याह्न पूजा और गणपति स्थापना करना शुभ होगा. पंचांग के अनुसार गणेश स्थापना का मुहूर्त 11:11 बजे से दोपहर 1:37 बजे तक है.

गणपति स्थापना कब करें? -हरतालिका पूजा के बाद गणेश चतुर्थी की मध्याह्न पूजा और गणपति स्थापना करना शुभ होगा. पंचांग के अनुसार गणेश स्थापना का मुहूर्त 11:11 बजे से दोपहर 1:37 बजे तक है.

अब बात करें तीज व्रत में रात्रि पूजन की तो, जो महिलाएं हरतालिक तीज के दिन रात्रि के चारों प्रहर में शिव पार्वती की पूजा करती हैं वह सुबह की एक बार पूजा के बाद रात्रि पूजन अपनी परंपरा अनुसार कर सकती हैं, क्योंकि इस व्रत में रात्रि जागरण का विधान है.

अब बात करें तीज व्रत में रात्रि पूजन की तो, जो महिलाएं हरतालिक तीज के दिन रात्रि के चारों प्रहर में शिव पार्वती की पूजा करती हैं वह सुबह की एक बार पूजा के बाद रात्रि पूजन अपनी परंपरा अनुसार कर सकती हैं, क्योंकि इस व्रत में रात्रि जागरण का विधान है.

हरतालिका तीज में रात्रि जागरण का मां पार्वती से संबंध माना गया है. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया और पूरी रात जागकर शिव-पार्वती का ध्यान और पूजन किया था, इसलिए इस दिन रातभर जागकर भजन-कीर्तन शिव पूजन किया जाता है.

हरतालिका तीज में रात्रि जागरण का मां पार्वती से संबंध माना गया है. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया और पूरी रात जागकर शिव-पार्वती का ध्यान और पूजन किया था, इसलिए इस दिन रातभर जागकर भजन-कीर्तन शिव पूजन किया जाता है.

Published at : 31 Aug 2026 05:19 PM (IST)

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