
खरगोन: पवित्र श्रावण मास के पावन अवसर पर खरगोन की पावन धरा भगवान भोलेनाथ की भक्ति में पूरी तरह लीन हो चुकी है. नगर के अधिष्ठाता देव भगवान श्री सिद्धनाथ महादेव का वार्षिक ‘शिव डोला महोत्सव’ अत्यंत श्रद्धा, विधि-विधान और पारंपरिक उल्लास के साथ आयोजित किया जा रहा है, जिससे समूचे क्षेत्र में आध्यात्मिक लहर दौड़ गई है.

यह पावन महोत्सव मालवा और निमाड़ अंचल की सदियों पुरानी धार्मिक विरासत, लोक-संस्कृति और अटूट जन-आस्था का सजीव प्रतीक माना जाता है. भगवान सिद्धनाथ महादेव का यह भव्य आयोजन क्षेत्र के धार्मिक इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है. प्रत्येक वर्ष सावन के इस विशेष अवसर पर देवाधिदेव महादेव के पावन दर्शन और मंगलमय आशीर्वाद पाने के लिए हजारों श्रद्धालु उत्सुक रहते हैं.

उत्सव का सबसे प्रमुख और मनोहारी आकर्षण भगवान श्री सिद्धनाथ महादेव की भव्य शिव डोला यात्रा है. इस पावन अवसर पर भगवान के दिव्य विग्रह को आकर्षक फूलों, मोतियों और पारंपरिक वस्त्र-आभूषणों से सजे भव्य डोले (पालकी) में विराजित किया जाता है. इसके पश्चात भगवान अपने भक्तों का हाल जानने और उन्हें दर्शन देने के लिए शाही ठाठ-बाट के साथ निकलते हैं.

जैसे ही भगवान का डोला मुख्य मार्गों से गुजरता है, पूरा शहर भक्ति के अनुपम रंग में रंग जाता है. यात्रा के साथ पारंपरिक ढोल-ताशे, झांझ-मंजीरे और मधुर भजन मंडलियां हरि-कीर्तन करते हुए चलती हैं. स्थानीय लोक कलाकारों के मनमोहक नृत्य और शिव भक्तों के गगनभेदी ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से पूरा वातावरण पूर्णतः शिवमय और आध्यात्मिक हो उठता है.

इस ऐतिहासिक शिव डोला यात्रा के दर्शन करने के लिए खरगोन शहर के साथ-साथ पूरे जिले और आसपास के क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. नगर के मुख्य मार्गों पर स्थानीय नागरिकों द्वारा आकर्षक रंगोलियां बनाई जाती हैं और छतों से पुष्पवर्षा कर डोले का भव्य स्वागत किया जाता है. जगह-जगह प्रसादी और शीतल जल के स्टॉल लगाए जाते हैं.

धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह पावन महोत्सव सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का एक अत्यंत सशक्त मंच भी सिद्ध होता है. हर वर्ग, समाज और आयु के लोग सारे भेदभाव भुलाकर भगवान शिव की सेवा और भक्ति में पूरी तरह जुट जाते हैं. निमाड़ की यह पावन परंपरा अपनी भव्यता और दिव्यता के कारण आज भी निरंतर जीवंत है.
Published at : 30 Aug 2026 10:01 PM (IST)
