

लखनऊ:
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह (45) की हत्या के मामले में पुलिस जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं. आरोप है कि धीरेंद्र प्रताप सिंह के ड्राइवर रवि किशन ने ही भरोसे का फायदा उठाकर हत्या की साजिश रची. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पहले चलती गाड़ी में धीरेंद्र प्रताप सिंह को नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश किया और इसके बाद उन्हें दो गोलियां मारीं. हत्या के बाद शव को सुनसान जगह पर फेंक दिया गया. वारदात के बाद आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह की फॉर्च्यूनर गाड़ी को मेदांता अस्पताल के पास छोड़कर फरार हो गए.
10 साल से ड्राइवर था रवि…
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अब तक की जांच में 4 लोगों के नाम सामने आए हैं. पुलिस ने ड्राइवर रवि और उसके एक साथी को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है. पूछताछ में सामने आया है कि रवि करीब 10 वर्षों से धीरेंद्र प्रताप सिंह के लिए काम कर रहा था और उनका बेहद भरोसेमंद था. आरोप है कि हत्या की साजिश रचने वालों ने इसी भरोसे का फायदा उठाया और रवि किशन को सुपारी का लालच देकर साजिश में शामिल किया.
दोनों गनर भी जांच के दायरे में…
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, धीरेंद्र प्रताप सिंह को दो गनर मिले हुए थे. इनमें से एक गनर शनिवार को बीमार होने के कारण ड्यूटी पर नहीं आया था. आरोप है कि ड्राइवर ड्राइवर रवि किशन तिवारी ने साजिश के तहत दूसरे गनर को भी ड्यूटी पर आने से मना कर दिया था.
एडीसीपी साउथ के मुताबिक, दोनों गनर उन्नाव पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए हैं. जल्द ही दोनों से पूछताछ की जाएगी कि वे ड्यूटी पर क्यों नहीं आए और उन्हें किसने रोका था.
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मोबाइल फोन से पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया कि धीरेंद्र प्रताप सिंह के पास दो मोबाइल फोन थे. आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए एक मोबाइल फोन ट्रेन में रख दिया था, जिससे उसकी लोकेशन लगातार बदलती रहे और पुलिस भ्रमित हो जाए.
पुलिस ने जब मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस की तो पहले गोसाईगंज, हैदरगढ़ और अमेठी के जगदीशपुर इलाके में लोकेशन मिली. इसके बाद मोबाइल की आखिरी लोकेशन चंदौली में मिली.
मामले में एसटीएफ की एंट्री
धीरेंद्र प्रताप सिंह हत्याकांड मामले में एसटीएफ की भी एक टीम साउथ जोन के साथ जांच मे लग गई है. एडीसीपी साउथ वसंतरालापल्ली ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि विवाद उन्नाव जिले के तहसील की एक प्रॉपर्टी का है, जहां धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने एसडीएम को दूसरे पक्ष की शिकायत की थी, जिस पर तहसील की जमीन को कब्जाने का आरोप था. अब तक की हुई जांच में यह निकल के सामने आ रहा है कि शायद इसी से ट्रिगर होकर के विवाद बड़ा और दूसरे पक्ष ने प्रतिक्रिया दी.
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लाइफ सेटल करने के लालच में ड्राइवर ने किया धोखा
वीरेंद्र सिंह के 10 साल पुराने ड्राइवर रवि पंडित और रवि किशन तिवारी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे लाइफ सेटल कराने का लालच दिया गया. दो जगह आलीशान घर और मोटी रकम के सपने दिखाए गए. ड्राइवर ने लखनऊ पुलिस को दो अन्य लोगों के नाम बताएं हैं, जिन्होंने ड्राइवर से धीरेंद्र सिंह की हत्या के मामले में संपर्क किया था और उसे अपने प्लान का हिस्सा बनाया था. इनकी तलाश में टीम लगी हुई है.
जॉइंट CP बबलू कुमार ने कहा, “पत्नी की तहरीर पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया है. इसके बाद मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई है. दोनों ने पूछताछ में हत्या की वारदात कुबूल की है. जमीनी विवाद में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है. मृतक का ड्राइवर और उसके साथी गिरफ्तार किए गए हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि अन्य अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तलाश जारी है. जल्द ही सभी को गिरफ्तार किया जाएगा. घटना में जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया है, उसे भी बरामद कर लिया गया है. मामले में 6 टीम लगाई गई है.





