
चित्रकूट/वाराणसी: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर रिकॉर्ड 135.2 मीटर तक पहुंच गया, जिससे 23 साल पुराना बाढ़ का रिकॉर्ड टूट गया. वहीं, काशी में गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है. रविवार रात 8 बजे राजघाट पर गंगा का जलस्तर 69.52 मीटर दर्ज किया गया. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, पानी 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है. गंगा का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है. ऐसे में गंगा अब चेतावनी बिंदु से महज 74 सेंटीमीटर नीचे रह गई है. जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ का दायरा भी बढ़ा है.
चित्रकूट में बाढ़ जैसे हालात के कारण 400 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है. करीब 16 गांवों के बाढ़ से प्रभावित होने का अनुमान है. जिला मजिस्ट्रेट पुलकित गर्ग ने रविवार को बताया कि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर रिकॉर्ड 135.2 मीटर तक पहुंच गया, जिससे 23 साल पुराना बाढ़ का रिकॉर्ड टूट गया.

लगभग 16 गांव प्रभावित
डीएम गर्ग ने कहा, “इससे पहले यहां सबसे ज्यादा जलस्तर 2003 में 134.5 मीटर था, लेकिन कल रात आई बाढ़ में जलस्तर 135.2 मीटर तक पहुंच गया. मंदाकिनी नदी के रिकॉर्ड रखे जाने के समय से लेकर अब तक, कल (शनिवार) का जलस्तर सबसे ज्यादा था. NDRF, SDRF और सभी की मदद से 400 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया. 3,000 से ज़्यादा खाने के पैकेट बांटे गए. खाने के पैकेट अभी भी बांटे जा रहे हैं. लगभग 16 गांव प्रभावित हुए हैं. वहां भी राशन और गर्म खाने का पूरा इंतजाम किया जा रहा है.”

चित्रकूट में 61 बाढ़ राहत शिविर बनाए
चित्रकूट में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए कुल 61 बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं. इन शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए न केवल रहने की जगह, बल्कि भोजन, पीने का पानी, रोशनी, साफ़-सफ़ाई और अन्य ज़रूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का इंतजाम किया गया है.

काशी में 69.52 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर, प्रशासन अलर्ट
काशी में गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है. रविवार रात 8 बजे राजघाट पर गंगा का जलस्तर 69.52 मीटर दर्ज किया गया. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य के लिए छह नावें और एक एनडीआरएफ टीम तैनात की गई है. प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को 28 फ्लड राहत किट, 110 लंच पैकेट, 30 फल पैकेट और 25 दूध पैकेट वितरित किए गए हैं. इसके साथ ही ओआरएस और क्लोरीन टैबलेट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

चुनौतीपूर्ण हो सकती है स्थिति
फिलहाल बाढ़ से किसी किसान, फसल या कृषि क्षेत्र को नुकसान दर्ज नहीं किया गया है. गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है और राहत एवं बचाव व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है. गंगा का जलस्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे आने वाले घंटों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.





