
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में 108 एंबुलेंस में कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी के चलते एक मासूम बच्चे की मौत के मामले ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना के सामने आने के बाद प्रदेश सरकार भी हरकत में आ गई है. मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
‘किसी भी प्रकार की लापरवाही पाने पर दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा’
उपमुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा प्रदेशवासियों को समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती है. ऐसे में यदि किसी मरीज को ऑक्सीजन की कमी या अन्य कारणों से परेशानी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी.
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, ‘पूरे मामले की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं. यदि जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो दोषियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा. उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी.’
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एंबुलेंस में पर्याप्त ऑक्सीजन ना होने के चलते बच्चे की मौत का अनुमान
गौरतलब है कि खंडवा में एक गंभीर रूप से बीमार बच्चे को इलाज के लिए 108 एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया जा रहा था. इस दौरान परिजनों ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस में पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण रास्ते में ही बच्चे की मौत हो गई. घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया.
फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि बच्चे की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या वास्तव में ऑक्सीजन की कमी या किसी अन्य लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
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