
भारत ने स्वदेशी तकनीक से रेलवे सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है. भारतीय रेलवे ने नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे के वाराणसी (BSB) डिवीजन में 614.75 रूट किलोमीटर पर 223 करोड़ रुपये की कुल लागत से ‘कवच वर्जन 4.0’ लगाने को मंजूरी दी है. इसके अलावा साउथ ईस्टर्न रेलवे के 6 किलोमीटर लंबे बारबिल-बोलानीखदान डबलिंग प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दे दी है. हम आपको बताएंगे कि कवच क्या है, वाराणसी डिवीजन में इसको लेकर क्या फैसले लिए गए हैं. साथ ही समझेंगे कि बारबिल-बोलानीखदान डबलिंग प्रोजेक्ट भारत के खनिज ढुलाई के पूरे तंत्र को कैसे मजबूत करेगा.
कवच क्या है?
‘कवच’ भारत में ही विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है, जिसे ऑपरेशनल सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाया गया है. इसे ऐसे समझिए कि ट्रेन के साथ कोई दुर्घटना नहीं हो, इसलिए इस कवच को बनाया गया है. यह ‘सिग्नल पासिंग एट डेंजर’ (SPAD) को रोकने में मदद करता है, जरूरत पड़ने पर अपने-आप ब्रेक लगाता है और ट्रेन के संचालन पर नजर रखकर सुरक्षित ट्रेन मूवमेंट में सहायता करता है.
अभी क्या फैसला लिया गया है?
रेलवे की ओर से जारी बयान के अनुसार, मंजूर किया गया प्रोजेक्ट वाराणसी डिवीजन के बाकी बचे चिन्हित हिस्सों में ‘कवच 4.0’ का दायरा बढ़ाएगा, जिससे ट्रेन संचालन के लिए सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत होगा. मंजूर किए गए काम से वाराणसी डिवीजन के बाकी हिस्सों में ट्रेन सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत होगा. यह पहल ट्रेनों के सुरक्षित और भरोसेमंद संचालन में मदद करेगी और अपने नेटवर्क पर स्वदेशी ‘कवच’ टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर लागू करने की भारतीय रेलवे की कोशिशों को भी बढ़ावा देगी.

काम की बात- वाराणसी मंडल पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के अंतर्गत आता है, और इसका कार्यक्षेत्र किसी एक सीधी रेखा (स्टेशन से स्टेशन) तक सीमित न होकर, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार के कई जिलों व रेल मार्गों तक फैला हुआ है. यह मंडल पूर्वी उत्तर प्रदेश के 12 जिलों (जैसे वाराणसी, आज़मगढ़, बलिया, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, गोरखपुर आदि) और पश्चिमी बिहार के 3 जिलों (जैसे सीवान, छपरा/सारण, गोपालगंज) के रेल खंडों को कवर करता है. इसके प्रमुख मुख्य मार्ग (रूट) ये हैं:
- गोरखपुर – छपरा मार्ग
- भटनी – प्रयागराज/इलाहाबाद सिटी मार्ग
- छपरा – औड़िहार मार्ग
- मऊ – शाहगंज मार्ग
- इंदारा – फेफना मार्ग
इसके अलावा और क्या फैसले लिए गए?
इस बीच, भारतीय रेलवे ने साउथ ईस्टर्न रेलवे के 6 किलोमीटर लंबे बारबिल-बोलानीखदान डबलिंग प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दे दी है. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार 122 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से मिनरल (खनिज) ले जाने वाले एक अहम कॉरिडोर पर रेल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा. जारी बयान के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इस रूट पर 8.9 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) का अतिरिक्त माल ढुलाई ट्रैफिक संभव हो सकेगा. डबलिंग से मालगाड़ियों की आवाजाही में होने वाली देरी को कम करने में भी मदद मिलेगी.
SAIL की खदान के विस्तार और बंदरगाह/प्लांट की क्षमता बढ़ाने का काम पूरी तरह से होने से पहले ही इस 6 किलोमीटर के हिस्से को डबल करने से, तय मिनरल कॉरिडोर में क्षमता की कमी (कैपेसिटी कंस्ट्रेंट) जैसी समस्याओं को रोकने में मदद मिलेगी.





