
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है. मान्यता है कि इस दिन दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी व पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. दीपक को अंधकार पर प्रकाश और नकारात्मकता पर सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन घर के मंदिर, मुख्य द्वार और दक्षिण दिशा में तिल के तेल या घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है. दक्षिण दिशा में दीपक जलाने को पितरों की शांति और कृपा से भी जोड़ा जाता है. हालांकि, अलग-अलग परंपराओं में इसके नियम भिन्न हो सकते हैं.

मान्यता है कि अमावस्या के दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में दीपक जलाना सबसे शुभ माना जाता है. इस समय भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और पितरों का स्मरण करते हुए दीप प्रज्वलित करने की परंपरा है. श्रद्धा और नियम के साथ किया गया दीपदान विशेष पुण्यदायी माना जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तिल के तेल का दीपक पितृ तर्पण और दोषों की शांति के लिए शुभ माना जाता है, जबकि देसी घी का दीपक भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए जलाया जाता है. अपनी परंपरा और श्रद्धा के अनुसार किसी भी दीपक का उपयोग किया जा सकता है.

दीपक हमेशा साफ स्थान पर रखें और उसे पूरी श्रद्धा से जलाएं. दीपक बुझने पर उसे फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए. पूजा के दौरान मन शांत रखें और भगवान का स्मरण करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक जलाते समय स्वच्छता और सकारात्मक भाव रखना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है.

एस्ट्रोलॉजर नीतिका शर्मा के अनुसार, अमावस्या पर दीपक जलाना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, श्रद्धा और आत्मिक शांति का प्रतीक भी माना जाता है. उनका कहना है कि दीपक जलाने का वास्तविक फल तभी मिलता है, जब उसके साथ सच्ची आस्था, अच्छे कर्म और ईश्वर के प्रति समर्पण भी जुड़ा हो.
Published at : 25 Jul 2026 11:50 AM (IST)
