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Shani Sade Sati: शनि की साढ़े साती से इस राशि को 2027 में भी नहीं मिलेगी राहत, नुकसान से बचने के लिए क्या करें? नोट करें उपाय


Shani Sade Sati 2027: 2026 में शनि की साढ़ेसाती मेष, कुंभ और मीन राशि वालों पर चल रही है. शनि का महादशा में काम में रुकावट, वैवाहिक जीवन में तनाव, संतान प्राप्ति में बाधा और आर्थिक रूप से संकट झेलना पड़ता है.

जीवन में कई अनचाही समस्याएं आती हैं जो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से परेशान करती हैं. 2027 में इन 3 राशियों में से कुछ को एक को तो छुटकारा मिल जाएगा लेकिन बाकी दो पर शनि देव कहर बरपाएंगे. साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए क्या उपाय लाभदायक हैं जान लें.

2027 में मेष और मीन को सताएगी शनि साढ़ेसाती

शनि की साढ़ेसाती साढ़े 7 साल तक रहती है. अभी शनि मीन राशि में विराजमान हैं, अगले साल 3 जून 2027 को सुबह 6.23 पर मेष राशि में प्रवेश करेंगे. शनि के राशि परिवर्तन से कुंभ राशि वालों को साढ़ेसाती से मुक्ति मिल जाएगी और वृषभ राशि की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी.

वहीं मेष और मीन राशि वालों को 2027 में शनि की साढ़ेसाती झेलनी पड़ेगी. साढ़ेसाती को केवल कठिन समय नहीं माना जाता, बल्कि कर्म, अनुशासन, धैर्य और जीवन में संतुलन सिखाने वाला समय भी माना जाता है.

शनि साढ़ेसाती उपाय

  • जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती हो, उन्हें किसी अपाहिज भिखारी को शनिवार के दिन अन्न का दान जरूर करना चाहिए.
  • हर शनिवार को शनि के मूल मंत्र, ‘नीलांजन समाभासं रवि पुत्रां यमाग्रजंम , छाया मार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्..’ का जाप जरूर करना चाहिए.
  • शनि के बीज मंत्र ‘ॐ प्रां प्रिं प्रौं स: शनैश्चराय नमः’ का जाप करने से भी लाभ मिलता है.
  • शनि की साढ़ेसाती का दुष्प्रभाव कम करने के लिए शनिवार की शाम एक कटोरी में तिल या सरसों का तेल डालकर उसमें 11 साबुत उड़द डालें. उसमे पांच मिनट देखने के बाद इस तेल को शनि मंदिर या हनुमान मंदिर में जाकर चढ़ाएं.
  • हर दिन हनुमान चालीसा या शनि चालीसा का पाठ करने से भी लाभ मिलता है. किसी ज्योतिषी की सलाह से नीलम भी धारण कर सकते हैं.

ध्यान रखें ये बातें

  • मैनेजमेंट – शनि साढ़ेसाती का समय जीवन में संतुलन और जिम्मेदारी को मजबूत करने वाला माना जाता है.  किसी भी निर्णय में जल्दबाजी करने के बजाय परिस्थिति को समझकर और योजना बनाकर आगे बढ़ना बेहतर रहेगा.
  • बचत – इस दौरान अचानक खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए आय और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी हो सकता है. अनावश्यक खरीदारी और बिना योजना के निवेश से दूरी रखना फायदेमंद रहेगा.
  • सम्मान – घर के बड़े लोगों का आदर, सहयोग और उनका अनुभव इस समय आपके लिए मार्गदर्शन का काम कर सकता है. सकारात्मक संबंध मानसिक स्थिरता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.
  • सेवा – जरूरतमंद लोगों की सहायता, सेवा कार्यों में भागीदारी और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है. यह समय संवेदनशीलता और कर्म के महत्व को समझने का भी संदेश देता है.

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