

राजस्थान के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है. बीकानेर से कोटपुतली के बीच प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट एक बार फिर रफ्तार पकड़ता नजर आ रहा है. NHAI ने इस प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति हेतु दोबारा बोलियां बुलाईं हैं. करीब 295 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद बीकानेर से कोटपुतली का सफर महज 3 घंटे में पूरा हो सकेगा. फिलहाल इस दूरी को तय करने में 6 से 7 घंटे तक का समय लग जाता है. इसके साथ ही राजस्थान के 10 शहरों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी.
क्या है एक्सप्रेसवे पर नया अपडेट?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रोजेक्ट पहले राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (RSRDC) स्तर पर अटकी हुई थी. बाद में NHAI ने इसे अपने हाथ में ले लिया. पहले जारी टेंडर निरस्त होने के बाद अब NHAI ने 295 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की DPR तैयार करने के लिए नए सिरे से कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
आधे समय में पूरा होगा सफर
अभी बीकानेर से कोटपुतली पहुंचने के लिए यात्रियों को पुराने रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है. फिलहाल इस रूट की लंबाई करीब 340 किलोमीटर है और यात्रा में 6 घंटे से ज्यादा समय लगता है. प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बनने के बाद दूरी घटकर लगभग 295 किलोमीटर रह जाएगी. एक्सप्रेसवे पर वाहन रफ्तार भरेंगे और यात्रा क इस सफर का समय घटकर करीब 3 घंटे रह जाएगा.
दिल्ली-NCR तक पहुंचना होगा आसान
यह एक्सप्रेसवे बीकानेर संभाग को सीधे दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) से जोड़ देगा. इससे बीकानेर, जैसलमेर और पश्चिमी राजस्थान के अन्य इलाकों से दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा पहुंचना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा. कोटपुतली से आगे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अंबाला-कोटपुतली एक्सप्रेसवे (NH-152D) का कनेक्शन भी मिलेगा, जिससे हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-NCR तक निर्बाध आवाजाही संभव होगी.
इन 10 शहरों और कस्बों को मिलेगा फायदा
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे राजस्थान के कई महत्वपूर्ण शहरों और कस्बों को जोड़ते हुए गुजरेगा. बीकानेर से करीब से शुरू होने वाला यह एक्सप्रेसवे नापासर, श्रीडूंगरगढ़, रतनगढ़, फतेहपुर शेखावाटी, मंडावा, झुंझुनू, उदयपुरवाटी, नीम का थाना और कोटपुतली से गुजरेगा.
राजस्थान के लिए क्यों है अहम प्रोजेक्ट?
यह एक्सप्रेसवे राजस्थान के पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों को सीधे पूर्वी राजस्थान और दिल्ली-NCR से जोड़ने का काम करेगा.. इससे व्यापार, पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों और माल परिवहन को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
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