
Daksheshwar Mahadev Temple: सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लग जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पूरे महीने में भगवान शिव अपने दिव्य निवास कैलाश पर्वत पर नहीं रहते?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भोलेनाथ पृथ्वी लोक पर अपनी ससुराल यानी हरिद्वार के कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में निवास करते हैं.
सावन में कनखल ही क्यों बनते हैं शिवजी का धाम?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) को भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान सृष्टि के संचालन और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं.
भगवान शिव सावन के महीने में माता पार्वती के साथ अपने ससुराल कनखल आते हैं और यहीं से पूरे ब्रह्मांड का संचालन करते हैं. यही वजह है कि सावन में कनखल में दर्शन और जल चढ़ाने का विशेष महत्व है.
क्या है दक्षेश्वर महादेव की पौराणिक कथा?
यह मंदिर प्रजापति दक्ष और माता सती के ऐतिहासिक प्रसंग से जुड़ा हुआ है:
राजा दक्ष का महायज्ञ: राजा दक्ष (माता सती के पिता) ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया.
माता सती का योगाग्नि में आत्मदाह: अपने पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण माता सती ने यज्ञ कुंड की अग्नि में अपने प्राणों की आहुति दे दी.
वीरभद्र का प्रकोप: इस घटना से क्रोधित होकर शिवजी के अवतार वीरभद्र ने राजा दक्ष का सिर काट दिया.
बकरे का सिर और शिव का वरदान: देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने प्रसन्न होकर राजा दक्ष के धड़ पर बकरे का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया. राजा दक्ष ने अपनी भूल स्वीकार की और शिवजी से प्रार्थना की कि वे हर वर्ष सावन के महीने में यहां निवास करें.
दक्षेश्वर महादेव मंदिर की खास बातें
उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित कनखल का दक्षेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण से बेहद खास माना जाता है. इस ऐतिहासिक मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां स्थित प्राचीन शिवलिंग और वह पौराणिक यज्ञ कुंड है, जिसे माता सती के आत्मदाह के प्रसंग से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि सावन के पवित्र महीने में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं, भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. मंदिर परिसर का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक है, जहां प्रसिद्ध मां आनंदमयी आश्रम और पवित्र गंगा घाट भी स्थित हैं, जो श्रद्धालुओं को एक दिव्य शांति का अनुभव कराते हैं.
सावन के दौरान यदि आप हरिद्वार की यात्रा पर जा रहे हैं, तो दक्षेश्वर महादेव के दर्शन करना बिल्कुल न भूलें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे महीने में भगवान शिव स्वयं कनखल में निवास करते हैं और अपने भक्तों की हर पुकार व प्रार्थना को प्रत्यक्ष रूप से सुनते हैं.
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