धर्म

Gajanan Sankashti Chaturthi 2026: गजानन संकष्टी चतुर्थी पर न करें ये गलती, बप्पा की पूजा कैसे करें, नियम और विधि देखें


Sawan Gajanan Sankashti Chaturthi 2026: आज सावन की गजानन संकष्टी चतुर्थी है. सावन महीने में भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व है. सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. इस बार रविवार 2 अगस्त को यह चतुर्थी है. पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं.

सावन महीने की संकष्टी चतुर्थी पर विधि-विधान से गणपति पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए इनकी भक्ति करने से भक्त की सभी बाधाएं दूर हो सकती हैं. इस दिन भगवान शिव और गणपति जी का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए.

बप्पा ने क्यों लिया गजानन स्वरूप

सावन की इस चतुर्थी को गजानन संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं. इस दिन भगवान गणेश के गजानन स्वरूप की पूजा करनी चाहिए. संकष्टी शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है संकटों से मुक्ति पाना. यही कारण है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करके भक्त दुखों और परेशानियों से छुटकारा पाने की प्रार्थना करते हैं. गणेश पुराण में भी चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा को शुभ बताया गया है.

शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार  सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 1 अगस्त 2026 को रात 11:07 पर शुरू होगी और अगले दिन 2 अगस्त 2026 को रात 11:15 पर समाप्त होगी. 2 अगस्त 2026 को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा.

शिव-पार्वती गणेश जी की करें पूजा

सावन महीने की संकष्टी चतुर्थी का संबंध भगवान शिव से भी माना जाता है. भगवान गणेश को भगवान शिव और माता पार्वती का पुत्र माना जाता है, इसलिए इस दिन गणेश पूजा साथ शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा है. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा में सुगंधित फूल, बेलपत्र खासतौर पर चढ़ाते हैं, देवी पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, बिन्दी, कुमकुम अर्पित करना चाहिए.

भगवान गणेश को पंचामृत से स्नान कराएं, इसके बाद जल से स्नान कराएं. वस्त्र और हार-फूल से श्रृंगार करें. धूप-दीप जलाएं. दूर्वा और लड्डू चढ़ाएं. ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करें. इस व्रत में भक्त पूरे दिन निराहार रहते हैं यानी अन्न का त्याग करते हैं. जो भक्त पूरे दिन भूखे नहीं रह पाते हैं, वे एक समय फलाहार कर सकते हैं, दूध और फलों का रस पी सकते हैं. शाम को भी भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा की जाती है.

पूजा करने के बाद भोजन ग्रहण किया जाता है. भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग खासतौर पर लगाया जाता है. इस दिन जरूरतमंदों को लड्डू, कपड़े, खाना, जूते-चप्पल, धन का दान करने की परंपरा भी है. कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा, व्रत और दान करने से जीवन में सुख-शांति आती है और परेशानियों से राहत मिलती है.

ऐसे कर सकते हैं संकष्टी चतुर्थी व्रत

  • व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए. कई लोग इस दिन काले तिल से स्नान करने की परंपरा का पालन करते हैं.
  • इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए. घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा करें.
  • मूर्ति सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी की हो सकती है. भगवान गणेश का शुद्ध जल और पंचामृत से अभिषेक करें.
  • इसके बाद उन्हें नए वस्त्र अर्पित कर श्रृंगार करें. पूजा में चंदन, चावल, फूल, धूप और दीप अर्पित करें.
  • भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग लगाएं और नारियल चढ़ाएं. संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें या सुनें और अंत में गणेश जी की आरती करें.
  • शाम को फिर से पूजा करें और चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य देकर व्रत पूरा करें.

व्रत से जुड़े नियम

  • दिन भर सात्विक रहें और क्रोध या अपशब्दों से बचें. चंद्रमा की पूजा के बाद ही व्रत का पारण करें.
  • इस दिन किसी का मन न दुखाएं. मोबाइल पर समय न गवाएं. इसमें बप्पा की भक्ति में लगाएं. व्रत में संयमित व्यवहार बहुत जरुरी माना गया है. 

पूजन मंत्र

  • ॐ नमो सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्न प्रशमनाय..
  • वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देवा, सर्व कार्येषु सर्वदा..
  • ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे, प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे, निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे..
  • ॐ वक्रतुण्डाय हुम्॥
  • ॐ गं गणपतये नमः॥

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 



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