
दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी ने सोमवार को ‘चलो संसद’ प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया. वो केरल भवन के पास धरने पर बैठ गई थीं. इस दौरान शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ गई. सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, इसमें शबाना को कुछ लोग हाथ पकड़ ले जाते दिखे. वो कमजोर लग रही थीं.
शबाना की तबीयत बिगड़ी
वीडियो में देखा जा सकता है कि एक शख्स सिक्योरिटी से गेट खोलने के लिए कहता है. वो कहते हैं- शबाना मैम हैं यार. पूर्व राज्यसभा सांसद हैं. पता नहीं है क्या इतना भी. इसके बाद दरवाजा खोला जाता है और शबाना को सिक्योरिटी केबिन में लेकर जाते हैं और वहां बैठाते हैं.
शबाना की तबीयत कैसे खराब हुई इसे लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
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एक्ट्रेस ने तबीयत खराब होने से पहले मार्च के दौरान पीटीआई से कहा, ‘प्रदर्शनकारियों का हिंसा करने का कोई इरादा नहीं है. हम यहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने आए हैं. ये अधिकार हमें संविधान ने दिया है. महात्मा गांधी ने हमें अहिंसा का मार्ग दिखाया है. हमारा हिंसा करने का कोई इरादा नहीं है.’ इसके अलावा शबाना ने कहा, ‘आपको सिर्फ इस बात की चिंता है कि बॉलीवुड के लोग मार्च में क्यों नहीं हैं. आपको उद्योगपतियों और कारोबारियों की गैरमौजूदगी की चिंता नहीं है. ऐसे सवाल पूछकर आप असली मुद्दे से ध्यान भटका रहे हैं और अनावश्यक विवाद पैदा कर रहे हैं. इस उद्देश्य के लिए मार्च कर रहे लोगों का समर्थन कीजिए, न कि मुद्दे को कमजोर कीजिए.’
Shabana Azmi felt quite unwell at Jantar Mantar today due to the heat and suffocation.
She reportedly experienced dizziness and loose motions as well. I don’t know what she might have eaten or drunk at Jantar Mantar.
Hopefully, she recovers soon,both physically and mentally. pic.twitter.com/5vTLD04thS
— Amit Kumar Sindhi (@AMIT_GUJJU) July 20, 2026
शबाना आजमी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
बता दें कि रविवार को शबाना आजमी जंतर मंतर भी गई थीं. वहां उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके से मुलाकात की.
जंतर मंतर से शबाना ने कहा था, ‘मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा. जावेद साहब ने भी पत्र लिखकर कहा, ‘कृपया बातचीत शुरू कीजिए. हम प्रेस के पास नहीं जा रहे हैं. हम इसे सार्वजनिक मुद्दा नहीं बनाएंगे. राज्यसभा के पूर्व सदस्य होने के नाते मैं ये अनुरोध कर रही हूं. कम से कम हमारी बात तो सुनिए. शुरुआत में हमें बताया गया कि दो दिन के अंदर जवाब दिया जाएगा. लेकिन न दो दिन में जवाब आया, न तीन दिन में और न ही चार दिन में. इसलिए पांचवें दिन हम खुद यहां आ गए.
