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देश में गाय गौमाता के रूप में पूजनीय… मुजफ्फनगर कोर्ट ने गोकशी में तीन दोषियों को सुनाई 10 साल कैद की सजा | Cow as gaumata in india court muzaffarnagar court 10 years jail for 3 accused


देश में गाय गौमाता के रूप में पूजनीय... मुजफ्फनगर कोर्ट ने गोकशी में तीन दोषियों को सुनाई 10 साल कैद की सजा

मुजफ्फरनगर कोर्ट गोकशी में सुनाई 10 साल की सजा

गोकशी के मामले में मुजफ्फनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 ने तीन दोषियों को 10 साल की सजा और 8 लाख जुर्माना लगाते हुए कहा कि गाय को ‘गौमाता’के रूप में पूजा जाता है और हिंदू धर्म में इसका धार्मिक महत्व है. एडिशनल सेशन जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गौमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रहा है.विकास की अंधी दौड़ के बीच भी आज गौमाता का दर्जा वही है. पहली रोटी गाय को देने की परंपरा है. बता दें कि गोकशी के एक मामले में मुजफ्फरनगर के बुदीना कलां निवासी मुंशाद, अबुजर और आस मोहम्मद को उत्तर प्रदरेश गौहत्या निवारण अधिनियम की धारा 3, 5 और 8 के तहत दोषी ठहराया गया है. 

भारत में गाय को ‘गौमाता’ का दर्जा प्राप्त है- कोर्ट

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक- अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि भारत में गाय को ‘गौमाता’ का दर्जा प्राप्त है और हिंदू धर्म में इसकी गहरी धार्मिक मान्यता है. गौहत्या हिंदू समाज के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है. इसकी वजह से सामाजिक सद्भाव और शांति के लिए भी खतरा पैदा होता है. कोर्ट ने ये भी कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि देश की सामाजिक संरचना, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण से गहराई से भी ये जुड़ा हुआ है. अदालत ने माना कि अवैध गौहत्या एक गंभीर और सामाजिक रूप से अंसवेदनशील अपराध है. गायों की रक्षा करना संवैधानिक कर्तव्य है.  गोकशी के मामले में कोर्ट ने तीन लोगों को 10 साल की सजा सुनाई है. बता दें कि 24 जनवरी 2021 में तितावी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत बुदिना कलां गांव के एक घर से 55 किलो गोमांस, गाय की खाल, सिर, खुर और गौहत्या के उपकरण बरामद हुए थे.

गोकशी सामाजिक रूप से संवेदनशील प्रकरण- कोर्ट

कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि गोकशी सामाजिक रूप से संवेदनशील प्रकरण है. भारत में गाय को गोमाता का दर्जा मिला है और वह पूजनीय है. इससे हिन्दू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं. और सामाजिक शांति और सौहार्द भंग होने का खतरा रहता है. शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है. हिन्दू धर्म में इसकी महत्ता को इससे भी समझा जा सकता है कि घर में पहली रोटी गाय की निकलती है. प्रत्येक सनातनी के हृदय में गौमाता का सम्मान है.
 




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