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दुनियाभर में मशहूर जयपुर का ‘चोखी ढाणी’ फिर चर्चा में, जानिए आखिर देसी-विदेशी सैलानियों को क्यों लुभाता है | jaipur chokhi dhani world famous tourist spot is again in spotlight after food safety action know about it


दुनियाभर के पर्यटक जब भी जयपुर घूमने आते हैं तो उनकी जुबान पर चोखी ढाणी का नाम जरूर रहता है. पिंकसिटी का मशहूर रिसॉर्ट इन दिनों एक अन्य वजह से चर्चा में है. राजस्थान के चर्चित पर्यटन स्थलों में शामिल चोखी ढाणी फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई के घेरे में आ गया है. वो जगह, जहां का ‘राजस्थानी स्वाद’ टूरिस्ट को खूब लुभाता है. ऐसे में खाद्य विभाग की कार्रवाई के बाद से हलचल तेज हो गई है. विभाग की टीम ने सैंपल को टेस्ट के लिए भेजा है, फिलहाल फाइनल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. हालांकि, सिर्फ राजस्थानी खाना ही नहीं बल्कि लोक संस्कृति के लिहाज से भी यह एक अलग पहचान रखता है. आइए जानते हैं आखिर क्या है चोखी ढाणी की खासियत.

जयपुर का चोखी ढाणी

जयपुर का चोखी ढाणी.

‘लिविंग हेरिटेज विलेज’ की तर्ज पर किया गया विकसित

जयपुर के टोंक रोड़ पर स्थित चोखी ढाणी दशकों से जयपुर में पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र रही है. अपनी स्थापना के समय से ही यह स्थान राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को एक ही छत के नीचे समेटने के लिए जानी जाती है. इसे एक ‘लिविंग हेरिटेज विलेज’ की तर्ज पर विकसित किया गया है.  यहां प्राचीन वास्तुशिल्प, चित्रकारी, हस्तशिल्प, लोककथाओं और आभूषणों के साथ पारंपरिक राजस्थान की वास्तविक संस्कृति की भी झल देखने को मिलती है.  

यहां लोक संस्कृति के साथ राजस्थानी लोक नृत्य की भी झलक देखने को मिलती है.

यहां लोक संस्कृति के साथ राजस्थानी लोक नृत्य की भी झलक देखने को मिलती है.

पर्यटक कालबेलिया नृत्य, घूमर, कठपुतली प्रदर्शन, लोक संगीत और ऊंट-बैलगाड़ी की सवारी के माध्यम से राजस्थानी ग्रामीण जीवन का अनुभव लेते हैं. पारंपरिक राजस्थानी भोजन और हस्तशिल्प के आकर्षण के कारण यह स्थान घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए जयपुर के सबसे प्रमुख स्थलों में गिना जाता है.

खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की बात आई सामने

राजस्थान में ‘शुद्ध आहार–मिलावट पर वार’ अभियान के तहत की रिसॉर्ट में कार्रवाई की गई. निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने रसोई में उपयोग हो रही सामग्रियों की गहन जांच की. इस जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन सामने आया है. अधिकारियों के अनुसार, खाद्य तेल की गुणवत्ता की जांच की गई, जिसमें ‘टोटल पोलर कंपाउंड’ (TPC) का स्तर 31 प्रतिशत दर्ज किया गया. 

खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत, बार-बार गर्म किए गए तेल में टीपीसी का स्तर 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. तय सीमा से अधिक स्तर का पाया जाना विभाग द्वारा मानकों के विपरीत माना गया है. 

90 किलो काजू के टुकड़े किए गए जब्त

निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने संस्थान से 90 किलो काजू के टुकड़े भी जब्त किए हैं. इन काजू की पैकेजिंग पर एक्सपायरी डेट भी अंकित नहीं थी. इन अनियमितताओं के सामने आने के बाद विभाग ने मावा, खाद्य तेल और काजू के नमूने सील कर दिए हैं. इन नमूनों को राज्य खाद्य प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया है, जहां से प्राप्त होने वाली रिपोर्ट ही आगामी कानूनी कार्रवाई का आधार बनेगी.

पर्यटकों की आवाजाही सामान्य

फिलहाल पर्यटकों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है और संचालन पर कोई औपचारिक रोक नहीं लगाई गई है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने के बाद ही खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के तहत अगली कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी. वर्तमान में पूरा मामला जांच की प्रक्रिया के अधीन है और संबंधित अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

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