
मध्य प्रदेश की धर्म नगरी उज्जैन में प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी की प्रतिमा चर्चा का विषय बन गई है. सिंहस्थ 2028 की प्लानिंग के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन ने मंदिर को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन प्रतिमा हटाई नहीं जा सकी. अब प्रशासन ने खुद भगवान की प्रतिमा को विस्थापित करने को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है. आधिकारिक बयान जारी करते हुए प्रशासन ने काह है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और प्रतिमा की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. बिना विशेषज्ञों की जांच और संत समाज की सहमति के प्रतिमा को स्थानांतरित नहीं किया जाएगा.
आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और क्षेत्र के विकास कार्यों के बीच प्रसिद्ध श्री खड़े हनुमान जी मंदिर की प्रतिमा को विस्थापना पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी गई है. सोशल मीडिया पर लगातार यह चर्चा चल रही है कि प्रशासन ने मशीनों और मजदूरों की मदद से प्रतिमा को हटाने की कई कोशिशें कीं. हालांकि, प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह से भ्रामक और निराधार बताया दिया है.
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‘अभी तक प्रतिमा हटाने की नहीं हुई कोई कोशिश’
उज्जैन प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि अब तक प्रतिमा को हटाने या हिलाने का ऐसा कोई भी प्रयास नहीं किया गया है. प्रशासन के अनुसार, प्रतिमा की वर्तमान स्थिति और उसकी संरचना का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा. विशेषज्ञों की तकनीकी राय प्राप्त किए बिना विस्थापन के संबंध में आगे की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.
दरअसल, इससे एक दिन पहले यानी बुधवार (9 सितंबर) तक यह खबरें चल रही थीं कि प्रशासन ने काफी दिन तक प्रतिमा को हटाने के कई प्रयास किए लेकिन वह नहीं हिली. ऐसे में भगवान को बारिश या किसी भी तरह के नुकसान से बचाने के लिए कैनोपी बना दी गई. मंदिर के पुजारी ने भी बताया था कि खड़े हनुमान जी में लोगों की बहुत आस्था है. इन्हें डॉक्टर हनुमान भी कहा जाता है. मंदिर के पुजारी ने मांग की थी कि दूसरी जगह जहां प्रतिमा विस्थापित होगी, वहां के कागज दे दें और कार्रवाई करने से पहले बताकर आएं, लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं किया था.
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