
Rishi Panchami 2026: भाद्रपद शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है, जो 15 सितंबर 2026 को है. यह पर्व सप्तऋषियों और अरुंधती के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना जाता है. इस दिन व्रत, स्नान, शुद्धि और सप्तऋषियों की पूजा का विशेष महत्व है. ऋषि पंचमी की एक खास परंपरा अपामार्ग यानी चिरचिटा की दातून से जुड़ी है. कई व्रत पद्धतियों में 108 बार दातून करने का विधान बताया गया है.
108 बार दातून क्यों की जाती है?
ऋषि पंचमी की व्रत विधि में सुबह स्नान से पहले अपामार्ग की दातून करने की परंपरा मिलती है. कुछ विधानों में 108 दातून से दांत साफ करने का उल्लेख है. इसके बाद स्नान किया जाता है. धार्मिक दृष्टि से इसका संबंध शरीर और मन की शुद्धि से जोड़ा जाता है.
ऋषि पंचमी को आत्मशुद्धि और जाने-अनजाने हुए दोषों के प्रायश्चित का व्रत माना जाता है. इसलिए दातून और स्नान को बाहरी शुद्धि के साथ आंतरिक संयम के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. हिंदू धर्म में 108 की संख्या को पूर्णता और आध्यतात्मिक साधना से जुड़ी मानी जाती है.
क्या खाना चाहिए?
ऋषि पंचमी की खास बात यह है कि कई व्रत-पद्धतियों में हल से जुती जमीन में पैदा हुए अनाज का सेवन नहीं किया जाता. ऋषि पंचमी व्रत के दिन सिर्फ भोजन का त्याग नहीं बल्कि ऋषियों के प्रति आभार, आत्मसंयम, शुद्ध आचरण और जाने-अनजाने हुए दोषों के लिए प्रायश्चित की भावना को महत्वपूर्ण माना जाता है.
- सामा या सांवा या मोरधन
- फल
- कंद-मूल
- दूध और दही
ऋषि पंचमी पूजा सामग्री
- सप्तऋषियों की तस्वीर
- जल
- पंचामृत
- फूल
- अक्षत
- चंदन
- रोली
- दीपक
- धूप
- कपूर
- फल
- मिठाई
- नारियल
- पान और सुपारी
- कलावा
- नैवेद्य
- सात्विक भोजन
ऋषि पंचमी पर न करें ये काम
- बेवजह के विवादों से दूरी रखें और वाणी पर संयम बनाए रखें.
- क्रोध को हावी न होने दें, मन को शांत और सकारात्मक रखने का प्रयास करें.
- किसी के प्रति कटु शब्द या अपमानजनक व्यवहार करने से बचें.
- पूजा को दिखावे का माध्यम न बनाएं, श्रद्धा और सरलता को प्राथमिकता दें.
- व्रत में शरीर की क्षमता का ध्यान रखें, स्वास्थ्य पर दबाव डालकर कठिन उपवास न करें.
FAQs
1. ऋषि पंचमी पर 108 दातून क्यों?
शुद्धि और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है.
2. ऋषि पंचमी पर क्या खाएं?
सामा, फल, कंद-मूल, दूध और दही ले सकते हैं.
3. ऋषि पंचमी पूजा सामग्री क्या है?
फूल, अक्षत, चंदन, रोली, दीपक, फल, नैवेद्य आदि.
4. ऋषि पंचमी पर क्या न करें?
क्रोध, विवाद, कटु वाणी और दिखावे से बचें.
हरतालिका तीज की पूजा में मिट्टी या बालू के शिवलिंग ही क्यों बनाते हैं, क्या है रहस्य
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.