
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष शुरू होते ही बाजारों में अचानक सन्नाटा छा जाता है. लोग नई गाड़ी की डिलीवरी टाल देते हैं, सोने के गहने खरीदने से बचते हैं और मकान की रजिस्ट्री नवरात्रि तक रोक देते हैं. आम धारणा बन चुकी है कि इन 16 दिनों में कुछ भी नया खरीदना ‘अशुभ’ होता है और इससे पितृ दोष लगता है. लेकिन क्या हमारे प्राचीन ग्रंथों में सचमुच ऐसा कोई नियम लिखा है, या यह सिर्फ पीढ़ियों से चला आ रहा एक डर है?
सच्चाई यह है कि गरुड़ पुराण, मनुस्मृति या किसी भी अन्य धर्मग्रंथ में पितृपक्ष के दौरान जरूरत की चीजें खरीदने की कोई मनाही नहीं है.
अशुभ नहीं, समर्पण का समय
सनातन परंपरा में पितृपक्ष को कभी ‘अशुभ’ काल नहीं कहा गया. यह समय पूर्वजों के प्रति आभार जताने और संयम बरतने का पर्व है. कोई भी माता-पिता या पूर्वज अपनी संतान को तरक्की करते, नया घर बनाते या वाहन खरीदते देखकर नाराज नहीं होते. शास्त्रों का सीधा तर्क है कि संतानों की सुख-समृद्धि से पितरों की आत्मा तृप्त होती है, न कि कुपित.
फिर यह भ्रम समाज में कैसे फैला?
मांगलिक कार्यों और खरीदारी में फर्क: शास्त्रों ने विवाह, मुंडन, सगाई और गृहप्रवेश जैसे बड़े आयोजनों को पितृपक्ष में रोकने को कहा था. वजह साफ थी, इनमें ढोल-नगाड़े, नाच-गाना और उत्सव होता है, जो पितरों के स्मरण के गंभीर माहौल से मेल नहीं खाता. धीरे-धीरे लोगों ने इस रोक को सामान्य बाजार की खरीदारी से भी जोड़ दिया.
ध्यान न भटकने की व्यवस्था: पुराने समय में ऋषियों ने यह नियम इसलिए बनाया ताकि 16 दिन लोग विलासिता और मौज-मस्ती छोड़कर सिर्फ अपने पूर्वजों के तर्पण, ध्यान और सेवा पर फोकस कर सकें.
दिखावे पर पाबंदी, जरूरत पर नहीं: इन दिनों में अहंकार और आडंबर मना है, लेकिन जीवन की जरूरी चीजों को हासिल करना पाप नहीं है.
किन चीजों को खरीदना माना जाता है श्रेष्ठ?
ज्योतिष और वैदिक नियमों के अनुसार, कई चीजें ऐसी हैं जिन्हें इस दौरान लेना बेहद शुभ फल देता है:
- सोना और चांदी: तर्पण और श्राद्ध कर्म में चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल सबसे उत्तम माना गया है. इस दौरान चांदी या सोने की खरीदारी पितरों के आशीर्वाद के समान मानी जाती है.
- मकान-जमीन का सौदा: प्रॉपर्टी बुक करना या रजिस्ट्री कराना पूरी तरह सही है. बस उसमें रहने जाने की पूजा (गृहप्रवेश) नवरात्रि में करनी चाहिए.
- दान की सामग्री: नए वस्त्र, छाता, बर्तन और अनाज खरीदकर जरूरतमंदों को देना इन 16 दिनों का सबसे बड़ा पुण्य कर्म है.
अगर कुछ नया खरीद रहे हैं, तो क्या करें?
यदि आप गाड़ी, लैपटॉप, जमीन या कोई भी जरूरी वस्तु खरीद रहे हैं, तो बस एक छोटा सा नियम निभाएं. सामान घर लाने के बाद मन ही मन अपने पितरों को याद करें और कहें कि “यह सब आपके दिए आशीर्वाद का ही फल है.” इसके बाद वस्तु को भगवान के सामने रखकर प्रणाम करें और किसी भूखे या जरूरतमंद को भोजन जरूर कराएं.
पितृपक्ष भय का नहीं, भाव का समय है. अंधविश्वास के डर से जरूरी काम रोकने की शास्त्रों में कोई सलाह नहीं दी गई है.
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