

यह कहानी सिर्फ एक अदालत के फैसले की नहीं, बल्कि उस युवा की है जिसने प्यार को रिश्ते में बदलने का सपना देखा था. नर्मदापुरम जिले के पिपरिया निवासी 26 वर्षीय सैयद खान अपनी प्रेमिका के साथ शादी करने के लिए भोपाल पहुंचे थे, लेकिन उनकी जिंदगी ने वहीं ऐसा मोड़ लिया जिसने सब कुछ बदल दिया. शादी की उम्मीद लेकर निकले सैयद पर धर्मांतरण का मामला दर्ज हो गया, परिवार ने साथ छोड़ दिया, नौकरी चली गई और जिस लड़की के साथ जिंदगी बिताने का सपना देखा था, वह भी हमेशा के लिए दूर हो गई. करीब डेढ़ साल तक चले कानूनी संघर्ष के बाद अदालत ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया, लेकिन इस दौरान उनकी निजी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी थी.
सैयद खान पिपरिया में एक कारखाने में मशीन ऑपरेटर के रूप में काम करते थे. उनके पड़ोस में रहने वाली दूसरे धर्म की एक युवती से उनकी पहचान हुई. समय के साथ दोनों की बातचीत बढ़ी और यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. जब दोनों को लगा कि वे एक-दूसरे के साथ पूरी जिंदगी बिताना चाहते हैं, तब उन्होंने शादी करने का फैसला किया.
शादी के लिए पहुंचे भोपाल
दोनों अलग-अलग धर्मों से थे, इसलिए उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत शादी करने का फैसला किया. 7 फरवरी 2025 को दोनों पिपरिया से भोपाल के लिए रवाना हुए. उनका उद्देश्य अदालत के माध्यम से विवाह की प्रक्रिया पूरी करना था. परिवार और समाज के संभावित विरोध को देखते हुए उन्होंने कानून का रास्ता चुना था.
अदालत पहुंचते ही बदल गई पूरी कहानी
बताया जाता है कि भोपाल कोर्ट पहुंचने के दौरान दोनों का कुछ वकीलों और समाजसेवियों के एक समूह ने विरोध किया. इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई और बाद में उन्हें एमपी नगर थाना पुलिस के हवाले कर दिया. यहीं से मामला एक नया मोड़ लेता है और सैयद खान के खिलाफ धर्म परिवर्तन कराने का प्रकरण दर्ज कर लिया जाता है.
केस दर्ज होते ही टूट गए रिश्ते
मामला दर्ज होने के बाद युवती अपने परिजनों के साथ वापस घर चली गई. दूसरी ओर सैयद खान को सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उनके अनुसार, इस घटना के बाद परिवार ने उनसे दूरी बना ली और कई रिश्ते टूट गए. जिस शादी की तैयारी थी, वह कानूनी लड़ाई में बदल गई.
कोर्ट में बदले गवाहों के बयान
मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब युवती और उसकी मां अपने पहले के बयानों से पीछे हट गईं. अदालत में युवती ने सैयद खान पर किसी तरह का आरोप लगाने से इनकार कर दिया. उसने कहा कि वह अपनी इच्छा से सैयद से शादी करना चाहती थी और उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं था.
सुनवाई के दौरान युवती की हो गई शादी
जब अदालत में मामला चल रहा था, उसी दौरान युवती की शादी उसके ही धर्म के एक युवक से हो गई. सैयद खान का कहना है कि उन्होंने युवती को आखिरी बार कोर्ट में ही देखा था. इसके बाद दोनों की राहें हमेशा के लिए अलग हो गईं.
मामले में सुनवाई के दौरान कई गवाह अपने पहले के बयानों से पलट गए. साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पिपरिया, जिला नर्मदापुरम अर्चना रघुवंशी की अदालत ने 8 सितंबर को सैयद खान को बाइज्जत बरी कर दिया. अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उन्हें राहत प्रदान की.





