
Parivartini Ekadashi 2026 Jagran Rules: परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026 को रखा जाएगा. मान्यता है कि चातुर्मास की योगनिद्रा के दौरान इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं. इसी कारण इसे परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी कहा जाता है. इस मान्यता के कारण कई व्रती रातभर जागरण करते हैं. लेकिन हर व्यक्ति के लिए पूरी रात जागना आसान नहीं होता. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर एकादशी की रात नींद आ गई या कोई सो गया तो क्या उसका व्रत टूट जाएगा?
इसका सीधा जवाब है, रात में सो जाने से एकादशी का व्रत अपने आप नहीं टूटता. जागरण को एकादशी व्रत का पुण्य बढ़ाने वाला विशेष अंग माना गया है, लेकिन नींद आने को अन्न खाने या जानबूझकर व्रत का संकल्प तोड़ने के बराबर नहीं माना जा सकता.
परिवर्तिनी एकादशी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी तिथि 21 सितंबर 2026 की रात लगभग 8 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर की रात करीब 9:43 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के कारण व्रत मंगलवार, 22 सितंबर को रखा जाएगा. व्रत का पारण 23 सितंबर की सुबह स्थानीय पंचांग में दिए गए समय के अनुसार किया जाएगा. शहर बदलने पर तिथि और पारण के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.
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क्या एकादशी पर रातभर जागना जरूरी है?
धार्मिक ग्रंथों और वैष्णव परंपराओं में एकादशी की रात भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए जागरण करने का विशेष महत्व बताया गया है. इस दौरान भजन, कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम, गीता या श्रीमद्भागवत का पाठ किया जाता है. मान्यता है कि जागरण से व्रत का आध्यात्मिक फल बढ़ता है.
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नींद आ जाने से व्रत तुरंत भंग हो जाएगा. व्रत टूटने का संबंध मुख्य रूप से व्रती के संकल्प और उसके लिए निषिद्ध भोजन ग्रहण करने से है. अगर किसी ने दिनभर नियम से व्रत रखा, भगवान विष्णु की पूजा की और रात में शारीरिक थकान के कारण सो गया तो उसका व्रत बेकार नहीं माना जाएगा.
जागरण श्रद्धा और क्षमता के अनुसार किया जाने वाला अतिरिक्त धार्मिक अभ्यास है. इसे डर या शरीर को कष्ट पहुंचाने की जिद नहीं बनाना चाहिए.
पूरी रात नहीं जाग सकते तो क्या करें?
अगर स्वास्थ्य और दिनचर्या साथ दे तो पूरी रात भजन-कीर्तन करते हुए जागरण किया जा सकता है. ऐसा संभव न हो तो शाम की पूजा के बाद कुछ समय भगवान विष्णु के नाम का जाप करें. विष्णु सहस्रनाम, श्रीहरि स्तोत्र या एकादशी व्रत कथा का पाठ कर सकते हैं.
रात 12 बजे तक जागकर पूजा करना भी एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है. इसके बाद भगवान विष्णु से अपनी असमर्थता बताते हुए प्रणाम करके सो सकते हैं. केवल मोबाइल चलाते हुए या टीवी देखते हुए जागे रहने को धार्मिक जागरण नहीं कहा जाएगा. जागरण का उद्देश्य नींद से लड़ना नहीं, बल्कि मन को भगवान के स्मरण में लगाना है.
अगर अधिक समय नहीं है तो सोने से पहले घी का दीपक जलाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप कर लें. अगली सुबह सूर्योदय से पहले उठकर भगवान विष्णु की पूजा और नाम-स्मरण किया जा सकता है.
बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति क्या करें?
बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बीमार व्यक्ति, बच्चे और नियमित दवा लेने वाले लोग रातभर जागने की जिद न करें. नींद और आराम शरीर की जरूरत हैं. ऐसे लोग शाम को पूजा करके कुछ देर मंत्र-जप करें और समय पर सो जाएं.
अगले दिन काम, स्कूल या लंबी यात्रा करने वाले लोगों को भी अपनी क्षमता के अनुसार नियम रखना चाहिए. पूरी रात जागकर अगले दिन वाहन चलाना या ऐसा काम करना जिसमें एकाग्रता जरूरी हो, सुरक्षित नहीं है. धर्म में श्रद्धा के साथ विवेक को भी महत्व दिया गया है.
दिन में सोकर रातभर जागना सही है?
एकादशी के दिन बहुत देर तक सोना या आलस्य में समय बिताना व्रत की भावना के अनुकूल नहीं माना जाता. अगर रात में जागरण करना है तो दिन में थोड़ी देर आराम किया जा सकता है, लेकिन पूरा दिन सोकर केवल रात में जागना व्रत का उद्देश्य पूरा नहीं करता.
व्रत का वास्तविक अर्थ केवल भूखे और जागते रहना नहीं है. उस दिन क्रोध, झूठ, निंदा, अपशब्द और बेवजह की बातचीत से बचना भी जरूरी माना गया है. दिन में भगवान विष्णु का स्मरण और सात्विक व्यवहार अधिक महत्वपूर्ण है.
सोते समय इन बातों का ध्यान रखें
यदि पूरी रात जागरण नहीं कर रहे हैं तो जमीन पर चटाई या सामान्य बिस्तर पर सो सकते हैं. बहुत अधिक आराम और विलासिता से बचने की परंपरा है, लेकिन जमीन पर सोना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है. कमर, घुटने या स्वास्थ्य की समस्या हो तो सामान्य बिस्तर का इस्तेमाल करें.
सोने से पहले भगवान विष्णु को प्रणाम करें. मन में कहें कि स्वास्थ्य या शारीरिक क्षमता के कारण आप पूर्ण जागरण नहीं कर पा रहे हैं. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और श्रीहरि का स्मरण करें.
क्या सोने से व्रत का फल कम हो जाता है?
धार्मिक मान्यताओं में जागरण को अतिरिक्त पुण्य देने वाला बताया गया है. इसलिए जागरण करने और न करने के धार्मिक फल में अंतर माना जा सकता है. लेकिन यह कहना उचित नहीं होगा कि रात में सोते ही व्रत टूट गया या दिनभर का उपवास बेकार हो गया.
एकादशी जागरण के माहात्म्य में भगवान विष्णु के सामने दीप जलाने, स्तोत्र पढ़ने, भजन करने और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने का उल्लेख मिलता है.
आखिर सही नियम क्या है?
परिवर्तिनी एकादशी पर रातभर जागरण करना शुभ माना गया है, लेकिन नींद आ जाने से व्रत नहीं टूटता. स्वस्थ व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार पूरी रात या आधी रात तक भजन और मंत्र-जप कर सकता है. बुजुर्ग, बीमार और कामकाजी लोग शाम की पूजा के बाद आराम कर सकते हैं.
व्रत की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि व्यक्ति कितने घंटे जागा. उसका संकल्प, आहार का संयम, भगवान विष्णु का स्मरण और व्यवहार की शुद्धता अधिक महत्वपूर्ण है.
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