धर्म

Hartalika Teej Rules: पहली बार रख रही हैं हरतालिका तीज? जान लें कुंवारी लड़कियों के लिए पूजा के 4 जरूरी नियम


Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत सिर्फ सुहागिनों के लिए ही नहीं, बल्कि मनचाहा जीवनसाथी चाहने वाली कुंवारी लड़कियों के लिए भी बेहद खास होता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक यह कठिन और निर्जला तप किया था.

यह व्रत जितना फलदायी है, इसके नियम उतने ही कड़े हैं. अक्सर कुंवारी कन्याएं अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठती हैं, जिससे व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता. अगर आप भी पहली बार यह व्रत रख रही हैं, तो इन जरूरी बातों का खास ध्यान रखें.

भूलकर भी न करें ये गलतियां

पानी या शरबत पीने की भूल: यह पूरी तरह से निर्जला व्रत होता है. सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है. अगर सेहत की मजबूरी न हो, तो गलती से भी दिन में पानी, चाय या जूस न पिएं.

दिन या रात में सोना: इस व्रत में सोने की मनाही होती है. मान्यता है कि तीज के दिन सोने से व्रत खंडित हो जाता है. दिन में पूजा की तैयारी करें और रात में परिवार की महिलाओं के साथ भजन-कीर्तन या जागरण करें.

काले और गहरे नीले कपड़े पहनना: पूजा में काले, गहरे नीले या स्लेटी रंग के कपड़े पहनने से बचें. इस दिन पीले, लाल, हरे, गुलाबी या नारंगी जैसे शुभ और चटक रंग के वस्त्र ही पहनें.

मां पार्वती को सिंदूर चढ़ाना: यह सबसे आम गलती है. सुहागिन महिलाएं देवी पार्वती को सिंदूर अर्पित करती हैं, लेकिन कुंवारी लड़कियों को मां पार्वती को सिंदूर नहीं चढ़ाना चाहिए. आप माता को चंदन, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें.

व्रत कथा सुने बिना उठना: शाम की पूजा के समय हरतालिका तीज की कथा सुनना अनिवार्य है. बिना कथा सुने पूजा अधूरी मानी जाती है.

पूजा के सही नियम और विधि

 

 

  • हाथों से बनाएं मूर्तियां: बाजार से रेडीमेड प्रतिमा लाने के बजाय घर पर ही शुद्ध गीली मिट्टी या साफ बालू रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति बनाएं.
  • प्रदोष काल में करें पूजा: शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त के तुरंत बाद यानी प्रदोष काल में पूजा करना सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है.
  • मन में रखें सात्विक भाव: दिनभर क्रोध, कटु वचन और किसी की बुराई करने से बचें; मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें.
  • प्रतिमा का आदरपूर्वक विसर्जन: अगले दिन सुबह स्नान और आरती करने के बाद मिट्टी की मूर्तियों को किसी पवित्र नदी या घर के साफ गमले में विसर्जित करें.
  • नियम से करें व्रत का पारण: विसर्जन और भोग लगाने के बाद ही जल या मीठा खाकर विधिवत व्रत खोलें, जिससे शिव समान गुणवान वर का आशीर्वाद मिलता है.

हरतालिका तीज पर मां पार्वती से कैसे लें सुहाग, इसके बिना अधूरी है पूजा

 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 



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