
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में शनिवार (12 सितंबर) को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके आदिवासी परिवारों से मिलने पहूंचे. इसके ठीक अगले दिन रविवार (13 सितंबर) को मुख्यमंत्री मोहन यादव पर हमला बोल दिया है. अभिजीत दीपके की एक सोशल मीडिया पोस्ट से हलचल मच गई है. इसमें उन्होंने खुद को मध्य प्रदेश का सीएम बताकर मोहन यादव पर तंज कसा है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तंज कसते हुए अभिजीत दीपके ने लिखा, “मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मध्य प्रदेश की जनता की सेवा करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद देता हूं, एक ऐसा अवसर जिसमें मैं स्पष्ट रूप से असफल रहा हूं.”
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दीपके ने शेयर किया ‘त्यागपत्र’
दीपके ने एक त्यागपत्र शेयर करते हुए खुद को मध्य प्रदेश का सीएम बताया है. उन्होंने त्यागपत्र में लिखा, “बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद मेरा जमीर मुझे इस पद पर बने रहने की इजाजत नहीं देता. मुख्यमंत्री के तौर पर, मैं उन्हें समय पर जरूरी मेडिकल देखभाल और मदद न दे पाने की जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं. इनमें से कई जानें शायद बचाई जा सकती थीं, और मैं उस नाकामी की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता.”
I hereby resign as the Chief Minister of MP with immediate effect.
I thank Hon’ble PM @narendramodi ji for giving me the opportunity to serve the people of MP, an opportunity in which I have clearly failed.@GovernorMP pic.twitter.com/BVhfJDIf5n
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 13, 2026
अभिजीत दीपके ने आगे लिखा, “उतना ही शर्मनाक है उनकी मौत के बाद हमारी संवेदनहीनता. हमने शुरू में हर बच्चे के लिए सिर्फ 22 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया, और आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद इसे बढ़ाकर 24 लाख रुपये किया. यह मुझे एक मुश्किल सवाल पूछने पर मजबूर करता है: क्या हम 24 लाख रुपये को काफी मानते अगर ये मंत्री या विधायक के बच्चे होते? हमारा रवैया दिखाता है कि हमने आदिवासी बच्चों की जिंदगी को कितनी कम अहमियत दी है.”
‘अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने में नाकाम रहे’
सीजेपी संस्थापक ने कहा, “इस त्रासदी की गंभीरता के बावजूद, हम स्वास्थ्य अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने में भी नाकाम रहे हैं. मासूम बच्चों की मौत के मामले में सबसे ऊंचे स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए. हमारी नाकामियां सिर्फ स्वास्थ्य सेवा तक सीमित नहीं हैं. जहां हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्हें ‘विश्वगुरु’ कहा जाता है, उन्होंने ‘हर घर नल योजना’ के तहत घरों तक नल का पानी पहूंचाने की कामयाबी का ऐलान किया है.”
वहीं बालाघाट के कुछ इलाकों में आदिवासी परिवार पीने के पानी के लिए अब भी नदी के पानी पर निर्भर हैं, जिससे उनकी सेहत को खतरा है. शिक्षा के क्षेत्र में भी हालात उतने ही चिंताजनक हैं. कई गांवों में स्कूल जानवरों के बाड़ों से भी बदतर हालत में हैं. बालाघाट के एक गांव में, आंगनवाड़ी से लेकर पाँचवीं कक्षा तक के लगभग 75 बच्चे एक ही क्लासरूम में पढ़ते हैं. स्थानीय आदिवासी समुदाय की बार-बार की गुहार के बावजूद, हम उन्हें स्कूल की सही इमारत नहीं दे पाए हैं.
अभिजीत दीपके ने बीजेपी सरकार पर क्या कहा?
पोस्ट में सीजेपी संस्थापक ने बताया, “आज, मैं शर्म से सिर झुकाकर कहता हूं कि 2003 से मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार के लगभग 21 साल रहने के बाद भी, हम कई आदिवासी परिवारों को सुरक्षित पीने का पानी, सही स्वास्थ्य सेवा और अच्छी शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं और सम्मान नहीं दिला पाए हैं.”
उन्होंने यह भी कहा, “कुछ आंकड़े आदिवासी समुदायों के प्रति मेरी सरकार की नाकामियों को और उजागर करते हैं. हमारी अपनी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 55,795 आदिवासी परिवारों के घरों में बिजली नहीं है. NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ हुए अपराधों में से 32% मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए. राज्य में 5.41 लाख से ज्यादा बच्चों (8.60%) को कम वजन वाला माना गया.”
दीपके ने आगे कहा, “विधानसभा में हमारी सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 1.36 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित पाए गए, जिनमें आदिवासी समुदायों के बच्चे बुरी तरह प्रभावित थे. मैं न केवल बालाघाट बल्कि पूरे राज्य के आदिवासियों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया हूं, और इतने सारे मासूम बच्चों की मौत के बाद, मुझे नहीं लगता कि इस पद पर बने रहने का मुझमें कोई नैतिक अधिकार बचा है. इसलिए, मैं तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा देता हूं.”
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