
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कसौली के एक होटल में कथित गैंग रेप मामले में हरियाणा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराते हुए पीड़िता की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी. जस्टिस राकेश कैंथला ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ शिकायतकर्ता के एकतरफा बयानों या हलफनामे के आधार पर किसी आरोपी को समन जारी नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब मामले का मुख्य चश्मदीद गवाह ही आरोपों का समर्थन न कर रहा हो.
ये मामला कसौली के एक प्रतिष्ठित होटल से जुड़ा है, जहां पीड़िता ने आरोप लगाया था कि 3 जुलाई 2023 को मोहन लाल बड़ौली और रॉकी मित्तल ने उसे और उसकी सहेली को नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया और घटना का वीडियो भी बनाया. इस संबंध में 13 दिसंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई थी.
पुलिस जांच में कोई ठोस सबूत नहीं
पुलिस जांच के दौरान आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले. इसके बाद कसौली की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 8 जनवरी 2026 को पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी. इस आदेश को चुनौती देते हुए पीड़िता ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी.
पीड़िता ने मेडिकल जांच कराने से किया था इनकार
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि कथित घटना और एफआईआर दर्ज होने के बीच करीब 18 माह का अंतर था, जबकि देरी का कोई संतोषजनक कारण रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया. अदालत ने यह भी नोट किया कि पीड़िता ने मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके.
होटल के कर्मचारियों ने भी असामान्य गतिविधि की नहीं की पुष्टि!
अदालत ने पाया कि होटल के कर्मचारियों और उस समय वहां ठहरे अन्य मेहमानों ने भी किसी प्रकार की चीख-पुकार या असामान्य गतिविधि होने की पुष्टि नहीं की. ऐसे में उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को उचित माना गया.
हाईकोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता के बयान महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन जब आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद न हों और अन्य परिस्थितियां शिकायत पर गंभीर सवाल खड़े करती हों, तब केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को मुकदमे का सामना करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
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