
भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार, 18 जून को कारोबार की शुरुआत बेहद सुस्ती के साथ की. गलोबल मार्केट से मिल रहे मिले-जुले संकेतों के बीच बाजार खुलते ही दोनों प्रमुख इंडेक्, में हल्की मजबूती देखी गई.सुबह 9:15 बजे बीएसई सेंसेक्स 76.89 अंक यानी 0.10% की बढ़त के साथ 77,232.51 पर कारोबार करता दिखा. वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 15.30 अंक यानी 0.06% की मामूली बढ़त के साथ 24,101 के स्तर पर खुला. भले ही बाजार की शुरुआत थोड़ी धीमी रही हो, लेकिन निफ्टी ने 24,100 के अहम लेवल को छूकर अपनी मजबूती बनाए रखने की कोशिश की है.
एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते से वैश्विक तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने निवेशकों को सतर्क बना रखा है. बाजार में तेजी के कुछ समय बाद ही हल्की गिरावट आई.सुबह के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 59 अंक यानी 0.08% की गिरावट के साथ 77,095.99 पर कारोबार करता दिखा.वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 8.75 अंक यानी 0.04% फिसलकर 24,076.95 के स्तर पर पहुंच गया.
IT शेयरों में बिकवाली, FMCG और मेटल में खरीदारी
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो IT शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा. निफ्टी IT इंडेक्स 1.70% तक टूट गया.इसके उलट निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी FMCG में 0.31% की बढ़त दर्ज की गई. वहीं निफ्टी मेटल 0.25% और निफ्टी केमिकल्स 0.21% मजबूत रहे.
इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
निफ्टी के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में इंफोसिस, HCLTech, TCS, टेक महिंद्रा, विप्रो, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व शामिल रहे.IT सेक्टर में दबाव की वजह से इन शेयरों में बिकवाली देखने को मिली.
US-Iran समझौते से बाजार को मिला सहारा
आज बाजार में जो थोड़ी-बहुत हरियाली दिख रही है, उसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता है.दोनों देशों ने बुधवार को आपसी संघर्ष को खत्म करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है तो अमेरिका फिर से हमले शुरू कर सकता है और ईरानी अधिकारियों को निशाना बना सकता है.
कच्चे तेल में गिरावट से निवेशकों का भरोसा मजबूत
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार गिर रहे हैं. ब्रेंट क्रूड 1.64% गिरकर 78.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं अमेरिकी WTI क्रूड में 2% की गिरावट आई और यह 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा.कच्चे तेल की नरम कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जाती हैं.
चूंकि भारत अपनी जरूरत का सबसे ज्यादा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है, इसलिए कच्चे तेल का सस्ता होना हमारी अर्थव्यवस्था और महंगाई को काबू में रखने के लिए बेहद अच्छा माना जाता है. यही वजह है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत है.
बाजार जानकारों का मानना है कि भारतीय बाजार पर फेड के फैसले का बहुत बड़ा असर देखने को नहीं मिलेगा.एक्सपर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का करीब 78 डॉलर प्रति बैरल तक आना भारतीय बाजार के लिए बड़ी राहत है. साथ ही रुपया भी लगभग 94.52 के स्तर पर स्थिर बना हुआ है, जो बाजार की मजबूती को समर्थन दे रहा है.
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अनिशा कुमारी
सबएडिटर
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