
Neeb Karori Baba: उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कैंची धाम के संत बाबा नीब करौरी (Neeb Karori Baba) के चमत्कारों की कहानियां देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी मशहूर हैं. स्टीव जॉब्स से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक, कई दिग्गज हस्तियां बाबा के दरबार में माथा टेक चुकी हैं.
बाबा को भगवान हनुमान का परम भक्त और साक्षात अवतार माना जाता है. उनके जीवन का एक ऐसा ही बेहद चर्चित प्रसंग है, जब आश्रम का सारा राशन खत्म हो चुका था और अचानक सैकड़ों भूखे लोग भोजन की आस में पहुंच गए थे.
अचानक पहुंचे 500 से अधिक श्रद्धालु
बात कैंची धाम आश्रम के शुरुआती दिनों की है. उस दिन आश्रम में सामान्य दिनों की तरह सीमित भक्तों के हिसाब से ही रसोई तैयार की गई थी. शाम होते-होते भंडार खाली हो गया. चूल्हा ठंडा पड़ चुका था और रसोई में केवल आटा-दाल के कुछ खाली डिब्बे ही बचे थे.
तभी अचानक आश्रम के मुख्य द्वार पर करीब 500 लोग आ पहुंचे. वे सभी दूर-दराज से यात्रा कर पहुंचे श्रद्धालु थे, जो बेहद भूखे और थके हुए थे. उस समय रात गहरा रही थी और आसपास कोई बाजार या दुकान भी खुली नहीं थी, जहां से तुरंत राशन मंगवाया जा सके.
चिंता में पड़ गए सेवादार
इतनी बड़ी संख्या में लोगों को देखकर आश्रम के सेवादार बुरी तरह घबरा गए. आश्रम की यह परंपरा थी कि वहां आया कोई भी व्यक्ति भूखे पेट नहीं लौटता था. परेशान होकर रसोई संभालने वाले सेवक सीधे बाबा नीब करौरी के पास पहुंचे. उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, “महाराज! आश्रम में न आटा बचा है, न घी और न ही सब्जियां. बाहर 500 से ज्यादा लोग भूखे बैठे हैं. अब हम क्या करें?”
बाबा ने सेवादार की घबराहट देखी और एक शांत, सौम्य मुस्कान बिखेर दी. उन्होंने बेहद सहज भाव से कहा, “चिंता क्यों करते हो? देने वाला तो ईश्वर है. जाओ, भंडार गृह में जो खाली बर्तन हैं, उन्हें साफ कपड़े से ढंक दो और बिना देखे भोजन बांटना शुरू करो.”
और शुरू हुआ अद्भुत ‘अन्नपूर्णा’ चमत्कार
सेवक बाबा के आदेश से असमंजस में थे, लेकिन उनकी आज्ञा को टालने का साहस किसी में नहीं था. रसोई में मौजूद पूरी और सब्जी के जो खाली भगोने थे, सेवादारों ने बाबा के कहे अनुसार उन पर एक लाल कपड़ा ढंक दिया.
इसके बाद हाथ जोड़कर बाबा और मां अन्नपूर्णा का स्मरण किया गया. जैसे ही सेवादार ने कपड़े के नीचे हाथ डालकर देखा, तो वहां गरम पूरियां और ताजी सब्जी मौजूद थी. पंगत बैठाई गई और भोजन परोसना शुरू हुआ.
- 500 से अधिक लोगों ने पेट भरकर गरम भोजन किया.
- सभी को तृप्त होकर भोजन करने के बाद प्रसाद भी बांटा गया.
- पूरी पंगत उठ जाने के बाद जब सेवादारों ने हांडी से कपड़ा हटाया, तो बर्तन में खाना अब भी ज्यों का त्यों बचा हुआ था.
यह दृश्य देखकर आश्रम के सभी सेवादार और भक्त अचंभित रह गए. सबकी आंखों में श्रद्धा के आंसू थे. बाबा नीब करौरी हमेशा अपने भक्तों से कहते थे कि सेवा का भाव अगर सच्चा हो, तो अभाव कभी बाधा नहीं बनता. कैंची धाम में आज भी यह मान्यता है कि वहां आने वाले किसी भी व्यक्ति को कभी भूखे पेट नहीं लौटना पड़ता.
Weekly Horoscope 13 to 19 September 2026: इन 4 राशियों के करियर में आएगा बड़ा उछाल, जानें मेष से मीन का साप्ताहिक राशिफल
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.