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Devshayani Ekadashi: चातुर्मास से पहले घर के ये 3 कोने बदल देंगे आपकी किस्मत! जानिए देवशयनी एकादशी के अचूक उपाय


Devshayani Ekadashi 2026: सनातन धर्म में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. इस साल 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी मनाई जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है. चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है.

वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, चातुर्मास शुरू होने से ठीक पहले यानी देवशयनी एकादशी का दिन सकारात्मक ऊर्जा के संचार और वास्तु दोषों को मिटाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है. यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी, कर्ज या करियर में रुकावटों का सामना कर रहे हैं, तो देवशयनी एकादशी पर ये 3 वास्तु उपाय कर सकते हैं:

उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) की सफाई और तुलसी पूजा

वास्तु शास्त्र में घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को देवी-देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा का निवास स्थान माना गया है. देवशयनी एकादशी के दिन घर के ईशान कोण को पूरी तरह साफ और स्वच्छ रखें. इस स्थान पर कचरा या भारी सामान न रखें.

उपाय: इस दिशा में तुलसी का पौधा स्थापित करें या पहले से मौजूद तुलसी के पास शाम के समय शुद्ध घी का दीपक जलाएं.

लाभ: माना जाता है कि इस स्थान को जागृत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, जिससे घर में धन का ठहराव होता है और दरिद्रता दूर होती है.

मुख्य द्वार पर स्वास्तिक और हल्दी जल का छिड़काव

घर का मुख्य द्वार खुशहाली और लक्ष्मी आगमन का मुख्य मार्ग होता है. चातुर्मास के 4 महीनों से पहले घर के मुख्य द्वार का वास्तु सुधारना आवश्यक माना जाता है. एकादशी की सुबह स्नान के बाद घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर रोली या सिंदूर से ‘स्वास्तिक’ का चिन्ह बनाएं.

उपाय: एक पात्र में स्वच्छ जल लेकर उसमें चुटकी भर हल्दी मिलाएं और मुख्य द्वार पर इसका छिड़काव करें.

लाभ: हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह और श्रीहरि विष्णु से है. यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है और नौकरी या बिजनेस में आ रही रुकावटों को समाप्त करता है.

आग्नेय कोण में दीपक और पीली कौड़ियों का उपाय

घर का दक्षिण-पूर्व कोना (आग्नेय कोण) अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और इसका सीधा संबंध धन-समृद्धि से होता है. एकादशी की संध्या को घर के मंदिर या आग्नेय कोण में एक पीले कपड़े पर 5 या 11 पीली कौड़ियां रखें.

उपाय: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के समक्ष देसी घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें.

लाभ: पूजन के बाद इन कौड़ियों को लाल या पीले कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रख दें. ऐसा करने से अनावश्यक खर्चों पर रोक लगती है और आय के नए स्रोत बनते हैं.

चातुर्मास के दौरान संयम, साधना और सात्विकता का विशेष महत्व है. इसलिए देवशयनी एकादशी के दिन से ही घर का माहौल शांत और सात्विक बनाए रखें तथा अपनी सामर्थ्य अनुसार अन्न या वस्त्र का दान करें.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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