धर्म

राखी बांधने से पहले भाई से ये एक वादा जरूर लें, धर्मग्रंथों में बहन की रक्षा का अर्थ केवल सुरक्षा नहीं


Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन को आमतौर पर भाई-बहन के प्रेम और भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प का पर्व माना जाता है. लेकिन धार्मिक परंपरा में रक्षा का अर्थ केवल बहन को बाहरी संकट से बचाना नहीं, बल्कि उसके सम्मान, सुख, आत्मसम्मान और जरूरत के समय उसके साथ खड़े रहना भी है. इसलिए राखी बांधते समय भाई से केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में बहन का साथ निभाने का वादा लेना इस पर्व की भावना को और गहरा बना सकता है.

रक्षा का संकल्प केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं

रक्षाबंधन की परंपरा में राखी बांधते समय बहन भाई की मंगलकामना करती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है. यहां रक्षा को बड़े स्तर पर समझना चाहिए. परिवार और समाज में किसी महिला के सम्मान की रक्षा करना, उसके साथ अन्याय होने पर उसके पक्ष में खड़ा होना और मुश्किल समय में उसे अकेला न छोड़ना भी रक्षा का संकल्प लेना चाहिए.

इसलिए भाई से ऐसा वादा लिया जा सकता है कि वह बहन के सुख-दुख में हमेशा उसके साथ रहेगा, उसकी बात सुनेगा और जरूरत पड़ने पर उसका सहारा बनेगा.

मनुस्मृति में नारी के सम्मान का भाव

भारतीय धार्मिक परंपरा में नारी के सम्मान को विशेष महत्व दिया गया है. मनुस्मृति में कहा गया है यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः अर्थात जहां स्त्रियों का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास माना गया है. रक्षाबंधन के संदर्भ में इस भाव को बहन के सम्मान से जोड़कर देखा जा सकता है.

राखी पर भाई से लें ये खास वादा

राखी बांधने के बाद बहन भाई से कह सकती है कि वह जीवन के हर उतार-चढ़ाव में उसके साथ खड़ा रहे. भाई यह संकल्प ले सकता है कि वह बहन की स्वतंत्रता और फैसलों का सम्मान करेगा, उसकी परेशानियों को सुनेगा और आवश्यकता पड़ने पर बिना किसी स्वार्थ के उसका साथ देगा.

ये वादा राखी के धागे को केवल एक रस्म न रखकर विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी के रिश्ते में बदल देता है

कृष्ण – द्रौपदी की कथा

महाभारत की कथा के अनुसार भगवान कृष्ण की उंगली से रक्त निकलने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा था. बाद में चीरहरण के प्रसंग में कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई. ये प्रसंग संकट के समय सम्मान और रक्षा के भाव का प्रतीक बन गया है.

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