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अभिषेक बनर्जी के ऑफिस के बाहर हंगामा, ‘अवैध’ साइनबोर्ड हटाने पहुंचे अधिकारियों से TMC कार्यकर्ताओं की भिड़ंत | Abhishek Banerjee Confronts KMC Officials Over TMC Office Signboard Row Political Controversy Erupts



पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय में कोलकाता नगर निगम (KMC) और पुलिस की कार्रवाई के दौरान हंगामा हो गया. कथित तौर पर एक ‘अवैध’ साइनबोर्ड हटाने पहुंचे अधिकारियों और TMC कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई. खबर मिलने पर, अभिषेक बनर्जी तृणमूल राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन और अन्य सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचे.

क्या हुआ था?

डायमंड हार्बर के सांसद और केएमसी अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई. जहां अधिकारियों का दावा था कि बिलबोर्ड गैर-कानूनी तरीके से लगाया गया था, वहीं अभिषेक का तर्क था कि केएमसी द्वारा लाया गया आदेश का दस्तावेज अमान्य था. उन्होंने कहा कि अगर आदेश वैध होता, तो दस्तावेज में बिलबोर्ड की तस्वीर शामिल होती. बाद में केएमसी अधिकारियों का एक समूह आदेश की संशोधित प्रति लेने के लिए निगम कार्यालय लौट गया.

अभिषेक बनर्जी ने सरकार पर साधा निशाना

मीडिया से बात करते हुए अभिषेक ने राज्य सरकार, केएमसी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर कड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस को जबरन खत्म करने की कोशिश की जा रही है. भारतीय जनता पार्टी इतनी डरी हुई क्यों है? पहले, प्रशासन ने तृणमूल कांग्रेस को लोकतांत्रिक तरीके से बैठकें और जुलूस आयोजित करने की अनुमति नहीं दी. सत्ताधारी पार्टी और प्रशासन नेताओं पर हमले कर रहे हैं, पार्टी कार्यालयों को नष्ट कर रहे हैं और बिलबोर्ड तोड़ रहे हैं. वे किस बात से डरते हैं? मैं सुवेंदु अधिकारी से कहना चाहता हूं कि तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न घास का फूल है. घास को जितना काटा जाएगा, वह उतनी ही अधिक बढ़ेगी.’

अभिषेक ने आरोप लगाया कि प्रशासन विशेष रूप से कामाक स्ट्रीट पर उनके पार्टी कार्यालय के बिलबोर्ड को निशाना बना रहा था, जबकि इलाके में कार्यालयों और दुकानों के कई अन्य बिलबोर्ड को नहीं छुआ गया. उन्होंने कहा, ‘हम इस कदम के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे. कोई भी भारतीय संविधान से ऊपर नहीं है.’

डेरेक ओ’ब्रायन ने क्या आरोप लगाए?

TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कार्रवाई को गैर-कानूनी बताते हुए कहा कि KMC और पुलिस बिना वैध दस्तावेजों के कार्रवाई करने पहुंचे थे. उन्होंने आरोप लगाया, ‘दोपहर करीब 3:30 बजे KMC और कोलकाता पुलिस एक गैर-कानूनी नोटिस लेकर आई. नोटिस पर कोई हस्ताक्षर नहीं था, न ही उसमें कोई तस्वीर या पर्याप्त जानकारी संलग्न थी. डेढ़ घंटे तक हमने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन बाद में वे जबरन बिल्डिंग में घुस गए.’

डेरेक ने दावा किया कि 150 से अधिक पुलिसकर्मी इमारत में दाखिल हुए और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की की गई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई का समय इसलिए चुना गया क्योंकि अगले दिन TMC की छात्र रैली प्रस्तावित है.

तापस रॉय का पलटवार

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री तापस रॉय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग खुद कानूनी और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान नहीं करते, उन्हें इस मामले पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा, ‘उन्हें कानूनी वैधता पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है. अब वे संविधान की बात कर रहे हैं, जबकि उनका खुद का रिकॉर्ड सबके सामने है.’

केएमसी अधिकारियों और पुलिस ने डायमंड हार्बर के सांसद और उनके सहयोगियों पर सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने का आरोप लगाया.

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