

सुरेश राही वर्तमान में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कारागार राज्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.
हरगांव विधानसभा अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है. सीतापुर जिले की राजनीति में हरगांव का हमेशा एक प्रमुख स्थान रहा है. हरगांव में सबसे बड़ी आबादी पासी (लगभग 90 हजार) मतदाताओं की है. इसके बाद कुर्मी (40 हजार), चमार/जाटव (35 हजार), ब्राह्मण (30 हजार), और मुस्लिम (26 हजार) मतदाता यहां की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं. यही कारण है कि यह सीट पासी समुदाय के नेताओं के लिए हमेशा से अनुकूल रही है.
सीट का इतिहास
इस सीट का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है. कांग्रेस के बाद 1989 से 1993 तक यहां बीजेपी ने तीन चुनाव लगातार जीते. मगर सपा ने 1996 में बीजेपी को हरा दिया. फिर 2002 से 2012 तक लगातार तीन बार बसपा यहां से जीत दर्ज की. लेकिन 2017 से यहां फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का परचम लहरा रहा है.
हरगांव से लगातार दूसरी बार (2017 और 2022) जीत दर्ज करने वाले सुरेश राही पासी समुदाय से आते हैं. उनके पिता रामलाल राही केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे थे और उनका इस क्षेत्र में बड़ा नाम था. सुरेश राही वर्तमान में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कारागार राज्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.
क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे
हरगांव विधानसभा में मुख्य रूप से विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे हावी रहते हैं. किसानों के लिए चीनी मिल से जुड़े मुद्दे सबसे अहम हैं. इसके साथ ही आम लोगों के लिए क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों (जैसे सन्नोदेवी मंदिर, सूर्य कुंड तीर्थ) का विकास और पर्यटन को बढ़ावा देना एक अहम मुद्दा है. कुल मिलाकर, हरगांव विधानसभा में पासी मतदाताओं का सीधा प्रभाव है और भाजपा ने इस सीट पर पिछले दो चुनावों से अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है.
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