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मेरठ की चमकेगी किस्मत: ₹600 करोड़ से बनेगा देश का पहला हाईटेक ‘ज्वैलरी पार्क’, दुबई-बेल्जियम को देगा टक्कर! | meerut india first hitech jewellery park vedvyaspuri project details


मेरठ अब सिर्फ खेलकूद के सामान, शिक्षा और भारी उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि ज्वैलरी कारोबार के लिए भी देशभर में अपनी एक नई पहचान बनाने जा रहा है. शहर में देश का पहला हाईटेक ‘ज्वैलरी पार्क’ बनने की तैयारी शुरू हो गई है. वेदव्यासपुरी में प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को दुबई और बेल्जियम के ज्वैलरी हब्स की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. खास बात यह है कि यहां एक ही छत के नीचे कारीगर, निर्माता, थोक व्यापारी और शोरूम संचालक अपना कारोबार कर सकेंगे.

हाथ से आभूषण बनाने के मामले में मेरठ पूरे एशिया में पहले स्थान पर है. इसके लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक एक लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ी गई, जिसके बाद आखिरकार यह सफलता मिली है. आइए जानते हैं कि इस ज्वैलरी पार्क में क्या खास होगा.

विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा पार्क

इस ज्वैलरी पार्क में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी. यहां कॉमन फैसिलिटी सेंटर, कॉन्फ्रेंस हॉल, ज्वैलरी म्यूजियम, बैंकिंग सुविधाएं, बुलियन ट्रेडिंग डेस्क और रूफटॉप रेस्टोरेंट जैसी अत्याधुनिक व्यवस्थाएं की जाएंगी. सुरक्षा के लिहाज से यहां मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम और अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे.

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह पार्क पूरी तरह ग्रीन टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा, जिसमें सोलर एनर्जी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, एसटीपी और जीरो-वेस्ट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इसे GRIHA 5-स्टार रेटिंग के मानकों के अनुरूप विकसित करने की योजना है.

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया ‘गेम चेंजर’

हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हॉल में मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन द्वारा इस ज्वैलरी पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री का एक भव्य प्रेजेंटेशन दिया गया. इसके प्रस्तावित नक्शे और आधुनिक डिजाइन को देखकर प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योग विभाग के अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने इसे मेरठ के आर्थिक विकास के लिए एक गेम चेंजर प्रोजेक्ट बताया.

₹5,000 से लेकर ₹20,000 प्रति वर्ग फीट की दर से मिलेगा स्पेस

यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है, तो मेरठ का सर्राफा कारोबार एक नई ऊंचाई को छुएगा. जिस तरह दुनिया बेल्जियम को हीरों के लिए और दुबई को सोने के व्यापार के लिए जानती है, ठीक उसी तरह आने वाले समय में मेरठ भी वैश्विक ज्वैलरी इंडस्ट्री के नक्शे पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराएगा.

सर्राफा कारोबारी देते हैं ₹1,500 करोड़ का जीएसटी: डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई

राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई इस प्रेजेंटेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे. उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट मेरठ के भविष्य को एक नई दिशा देगा और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मेरठ के सर्राफा कारोबारी सरकार को सालाना करीब 1,500 करोड़ रुपये का जीएसटी देते हैं.

मेडा और व्यापारी मिलकर करेंगे सपना साकार: अर्पित गुप्ता

मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव अर्पित गुप्ता ने कहा कि यह देश का पहला ऐसा अनूठा मॉडल होगा, जिसे व्यापारी और विकास प्राधिकरण मिलकर साकार करेंगे. व्यापारियों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि छोटे कारीगरों और दुकानदारों के लिए बेहद किफायती दरों पर जगह (स्पेस) उपलब्ध कराई जाएगी. इसके साथ ही पार्क के आसपास कारीगरों के लिए आवासीय सुविधाएँ भी विकसित की जाएँगी.

इसी साल काम शुरू होने की उम्मीद

मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के महामंत्री विजय आनंद अग्रवाल ने बताया कि मेरठ विकास प्राधिकरण के पास वेदव्यासपुरी में 36 हजार वर्ग मीटर जमीन उपलब्ध है, जिस पर मेडा इस ज्वैलरी पार्क का निर्माण करेगा. जमीन की कीमत और निर्माण कार्य को मिलाकर इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 600 करोड़ रुपये की लागत आएगी. मेडा द्वारा इसका डिजाइन फाइनल कर प्रेजेंटेशन में पास कर दिया गया है, हालांकि इसमें अभी कुछ और जरूरी सुझाव शामिल किए जाएंगे.

मेडा सर्राफा कारोबारियों से इस राशि का भुगतान किस्तों के रूप में लेगा. विजय आनंद अग्रवाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में स्थानीय कारीगरों का विशेष ध्यान रखा जाएगा. शोरूम के लिए मेडा जहाँ ₹20,000 प्रति वर्ग फीट की दर तय करेगा, वहीं ऊपरी मंजिलों पर कारीगरों को मात्र ₹5,000 प्रति वर्ग फीट में स्पेस दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए एक दशक से लंबी लड़ाई चल रही थी, जो अब जाकर खत्म हुई है. हमें पूरी उम्मीद है कि इसी साल इस पर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा.

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सनुज शर्मा

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