

नई दिल्ली:
इलेक्शन कमीशन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नाम हटाए जाने या जोड़े जाने संबंधी 37 लाख से अधिक अपील अब भी लंबित हैं. निर्वाचन आयोग ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित न्यायाधिकरणों ने अब तक दाखिल 38.20 लाख अपील में से करीब 1.02 लाख का ही निपटारा किया है.
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत एवं न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की एसआईआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस की याचिका पर 17 जुलाई को सुनवाई की थी.
याचिका में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं की ओर से दाखिल दावों और आपत्तियों का विधानसभा क्षेत्रवार ब्योरा सार्वजनिक करने का अनुरोध किया गया था. पीठ ने इस पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था.
बोस ने याचिका में कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के गणना चरण के दौरान 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए थे. उन्होंने कहा कि दावे और आपत्तियां दाखिल करने के चरण में नाम जोड़ने के लिए प्रपत्र छह और 6ए के जरिये 9.64 लाख आवेदन तथा नाम हटाने के लिए प्रपत्र सात के जरिये 99,000 से अधिक आवेदन मिले थे, लेकिन 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में केवल करीब 1.82 लाख नाम जोड़े गए.
उच्चतम न्यायालय ने 25 अगस्त को निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या जोड़े जाने को चुनौती देने वाली अपीलों के लंबित रहने और उनके निपटारे से संबंधित आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया था.
न्यायालय में निर्वाचन आयोग की ओर से पेश आंकड़ों के अनुसार, मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद 17 दिसंबर 2025 से सात अगस्त 2026 के बीच प्रपत्र छह के तहत 34.13 लाख आवेदन दाखिल किए गए. प्रपत्र छह मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित आवेदन पत्र है.
इस आंकड़े में पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए आवेदन करने वाले लोगों के साथ वे मतदाता भी शामिल हैं, जिनके नाम मसौदा मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान हटा दिए गए थे.
करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल तथा पड़ोसी ओडिशा और झारखंड के लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था. बाद में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने अपीलों पर फैसला करने के लिए उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 19 न्यायाधिकरण गठित किए थे.





