

फिल्म देखने वाले दर्शकों के लिए एक बड़ी खबर है. फिल्मों को सर्टिफिकेट देने वाले सेंसर बोर्ड यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. करीब 35 साल बाद इन गाइडलाइंस को अपडेट किया गया है. नए नियमों में फिल्मों में दिखाए जाने वाले ड्रग्स, हिंसा और बच्चों से जुड़े कंटेंट को लेकर कुछ अहम बदलाव किए गए हैं. इसका मकसद दर्शकों को फिल्म के कंटेंट के बारे में पहले से ज्यादा साफ जानकारी देना है.
ड्रग्स वाले सीन पर देना होगा खास संदेश
नई गाइडलाइंस में नशीले पदार्थों से जुड़े सीन को लेकर खास प्रावधान किया गया है. अगर किसी फिल्म में ड्रग्स या दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन, बिक्री या तस्करी दिखाई जाती है, तो उसके साथ दर्शकों के लिए जरूरी चेतावनी भी दिखाई जाएगी.
इसका उद्देश्य ड्रग्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देने या उसे सामान्य बताने से रोकना है. खासकर युवा दर्शकों पर ऐसे कंटेंट के असर को ध्यान में रखते हुए फिल्म में नशीले पदार्थों से होने वाले नुकसान को लेकर जागरूकता संदेश देने पर जोर दिया गया है.
बच्चों की उम्र के हिसाब से मिलेगी जानकारी
फिल्मों की कैटेगरी को लेकर भी नियमों को ज्यादा स्पष्ट किया गया है. अब UA कैटेगरी में उम्र के हिसाब से अलग-अलग संकेत दिए जाएंगे. इनमें UA 7+, UA 13+ और UA 16+ जैसे एज मार्कर शामिल हैं.
Specific attention is drawn to the Age Markers indicating the age appropriateness of Content. These markers exist to educate and better inform families and parents so they can make meaningful entertainment choices for children. Film makers need to highlight these markers in… https://t.co/cFfAGHyNqH
— Shashi Shekhar Vempati शशि शेखर वेम्पटि (@shashidigital) September 18, 2026
इससे माता-पिता को यह समझने में आसानी होगी कि किसी फिल्म में किस उम्र के बच्चे को देखने की अनुमति दी जा सकती है. फिल्म का ट्रेलर, पोस्टर या दूसरे प्रमोशनल कंटेंट में भी इन उम्र संबंधी संकेतों को साफ तरीके से दिखाने पर जोर दिया गया है.
हिंसा और अश्लील कंटेंट पर भी नजर
नई गाइडलाइंस में सिर्फ ड्रग्स और बच्चों से जुड़े नियम ही नहीं हैं. फिल्मों में हिंसा, अश्लीलता, यौन हिंसा, सांप्रदायिक तनाव और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कंटेंट को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही गई है.
खास तौर पर अपराध या हिंसा को इस तरह दिखाने से बचना होगा, जिससे वह दर्शकों के सामने आकर्षक या सही नजर आए. फिल्म निर्माताओं को कहानी की जरूरत और दर्शकों पर उसके संभावित प्रभाव को ध्यान में रखकर ऐसे दृश्यों को पेश करना होगा.
फिल्ममेकर्स और दर्शकों दोनों के लिए अहम बदलाव
CBFC के इन बदलावों से फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्मों के कंटेंट को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिलेगी. वहीं दर्शकों और माता-पिता को भी फिल्म देखने से पहले उसके कंटेंट और उम्र संबंधी जानकारी आसानी से मिल सकेगी.
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