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दूध में ‘झाग’ के नाम पर जहर! महाराष्ट्र में FDA जांच में डिटर्जेंट की मिलावट का चौंकाने वाला खुलासा | Maharashtra Poison guise foam in milk Shocking revelation detergent adulteration FDA probe 



महाराष्ट्र में दूध की गुणवत्ता को लेकर की गई जांच में एक हैरान करने वाला खुलासा सामने आया है. खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की प्रयोगशालाओं में जांच के लिए पहुंचे दूध के कई सैंपल्स में डिटर्जेंट की मिलावट पाई गई. जांच के दौरान सामने आया कि कुछ मिलावटखोर दूध को अधिक गाढ़ा और ताजा दिखाने के लिए उसमें ऐसे रसायन मिला रहे हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं.

FDA लैब में पहुंचे सैंपल्स की जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई मामलों में दूध की गुणवत्ता संदिग्ध थी और उसमें कृत्रिम तरीके से झाग पैदा करने वाले तत्व मौजूद थे. इससे आम उपभोक्ताओं के सामने खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

दूध में डिटर्जेंट क्यों मिलाया जाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटखोर पानी, यूरिया और अन्य सस्ते पदार्थों को मिलाकर सिंथेटिक दूध तैयार करते हैं. लेकिन नकली दूध को असली जैसा दिखाने के लिए उसमें डिटर्जेंट मिला दिया जाता है. डिटर्जेंट की वजह से दूध में गाढ़ा झाग बनने लगता है और देखने में वह अधिक ताजा तथा शुद्ध प्रतीत होता है. यही झाग उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है. दूध खरीदते समय कई लोग झाग और गाढ़ेपन को गुणवत्ता की पहचान मान लेते हैं जबकि कई मामलों में यही झाग मिलावट का संकेत हो सकता है.

सेहत के लिए कितना खतरनाक है मिलावटी दूध?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डिटर्जेंट मिला दूध शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इसके सेवन से फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसे पदार्थों का सेवन करने से लिवर और किडनी पर भी बुरा असर पड़ सकता है. बच्चों के लिए यह खतरा और ज्यादा गंभीर माना जाता है. क्योंकि उनका शरीर विकास की अवस्था में होता है. ऐसे में मिलावटी दूध उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है.

वैज्ञानिक तरीके से पकड़ी जाती है मिलावट

FDA की लैब में दूध की जांच कई वैज्ञानिक परीक्षणों के जरिए की जाती है. डिटर्जेंट और सिंथेटिक दूध की पहचान के लिए ब्रोमोक्रेसोल पर्पल सॉल्यूशन का उपयोग किया जाता है. यदि दूध बैंगनी रंग में बदल जाए तो मिलावट की आशंका मानी जाती है. 

स्टार्च की जांच के लिए आयोडीन डाला जाता है जबकि यूरिया की पहचान के लिए विशेष रासायनिक परीक्षण किए जाते हैं. फॉर्मेलिन जैसी खतरनाक मिलावट को पहचानने के लिए अलग परीक्षण अपनाए जाते हैं. वहीं पानी की मात्रा का पता लगाने के लिए लैक्टोमीटर का इस्तेमाल किया जाता है.

हजारों लीटर नकली दूध जब्त

मिलावटी दूध के खिलाफ महाराष्ट्र में FDA ने हाल के दिनों में कई बड़ी कार्रवाई की हैं. लातूर के किलारी क्षेत्र में छापेमारी कर करीब 7500 लीटर नकली दूध और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पाउडर जब्त किया गया. वहीं सोलापुर के सांगोला इलाके में लगभग 37,532 लीटर मिलावटी दूध नष्ट कराया गया जिसकी कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई. सतारा जिले के मोही गांव में कार्रवाई के डर से एक व्यक्ति कथित रूप से सैकड़ों लीटर संदिग्ध दूध सड़क पर बहाकर फरार हो गया.

डेयरी फार्मों में भी मिलीं कई खामियां

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कुछ डेयरी इकाइयों में साफ-सफाई से जुड़ी गंभीर कमियां भी पाईं. कई जगह दूध भंडारण क्षेत्रों में फफूंद, चूहों और कीड़ों से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे. कुछ स्थानों पर वाहनों की सफाई का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिला.

सख्ती पर समर्थन भी, विरोध भी

FDA के आयुक्त तुकाराम मुंडे की सख्त कार्रवाई की कई लोगों ने सराहना की है. हालांकि मुंबई के कुछ दूध विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों ने नई व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि खुले दूध की जगह पैक दूध की व्यवस्था को तुरंत लागू करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है. व्यापारियों ने नई व्यवस्था लागू करने के लिए कुछ समय देने की मांग की है.

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