
Shakun Shastra: अक्सर सुबह के समय या दोपहर में घर की छत, मुंडेर या बालकनी पर कौए का आकर बैठना और लगातार कांव-कांव करना एक आम बात है. आमतौर पर लोग कौए की आवाज सुनते ही यही सोचते हैं कि घर में कोई मेहमान आने वाला है. लेकिन सनातन परंपरा, शकुन शास्त्र में कौए की हर गतिविधि, उसके बैठने की दिशा और उसकी आवाज के लहजे के अलग-अलग संकेत बताए गए हैं.
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार कौआ एक ऐसा पक्षी है जो काफी संवेदनशील होता है. माना जाता है कि उसमें आने वाले समय का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता होती है. ऐसे में छत पर कौए का बोलना किसी प्रियजन के आने का संदेश है या फिर किसी समस्या की आहट, आइए नारद संहिता के अनुसार इसका सही अर्थ समझते हैं.
कौए की कांव-कांव का संकेत
नारद संहिता के अनुसार, कौए की आवाज का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस दिशा में मुंह करके बैठ कर बोल रहा है और उसकी आवाज कैसी है.
शुभ समाचार और मेहमान का आगमन: यदि कौआ घर की छत पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके शांत और मीठे स्वर में कांव-कांव करता है, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है. यह संकेत देता है कि जल्द ही घर में किसी प्रिय अतिथि का आगमन हो सकता है या किसी दूर रहने वाले रिश्तेदार से अच्छी खबर मिल सकती है.
धन लाभ का संकेत: उत्तर-पूर्वी (ईशान) कोण में बैठकर कौए का बोलना रुके हुए काम बनने और आर्थिक लाभ होने का संकेत माना गया है.
विवाद या सतर्कता का संकेत: इसके विपरीत, यदि कौआ दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके तीखे या घबराए हुए स्वर में लगातार चिल्लाता है, तो यह किसी समस्या की चेतावनी हो सकती है. यह अकारण विवाद, सेहत से जुड़ी चिंता या यात्रा में रुकावट का अंदेशा देता है.
भोजन या पानी के पास होना
यदि छत पर बैठा कौआ अपने मुंह में रोटी का टुकड़ा या कोई अन्य खाने की चीज दबाए हुए दिखता है, तो इसे शुभ माना जाता है. यह किसी पुरानी इच्छा के पूरे होने और घर में समृद्धि बढ़ने की ओर इशारा करता है. वहीं अगर कौआ पानी से भरे बर्तन पर बैठकर बोलता है, तो इसे धन लाभ का योग माना गया है.
सिर के ऊपर से उड़ना या छूना
यदि कौआ उड़ते हुए किसी व्यक्ति के सिर से छूकर निकल जाए या सिर पर बैठ जाए, तो शकुन शास्त्र में इसे शारीरिक या मानसिक तनाव का संकेत माना जाता है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को संयम रखने और यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
एक साथ कई कौओं का चिल्लाना
यदि घर की छत पर अचानक कई कौए जमा होकर जोर-जोर से शोर मचाने लगें, तो इसे उस स्थान के वातावरण में अशांति का सूचक माना जाता है. यह संकेत देता है कि परिवार के सदस्यों को आपसी बातचीत में थोड़ा धैर्य रखना चाहिए ताकि विवाद न हो.
ज्योतिषीय में शनि और पितृ पक्ष से संबंध
ज्योतिष शास्त्र में कौए का संबंध शनिदेव और पितरों से जोड़ा गया है. कौआ शनिदेव का वाहन माना जाता है और धार्मिक मान्यताओं में इसका जुड़ाव पितरों से भी माना गया है.
पितृ दोष में राहत: यदि आपकी छत पर कौआ नियमित आता है, तो उसे रोटी या अनाज देना अच्छा माना गया है. मान्यता है कि इससे परिवार पर आने वाली परेशानियां टलती हैं.
शनि देव का प्रभाव: शनिवार के दिन कौए को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी देने से शनि से जुड़ी रुकावटें और समस्याएं कम होती हैं.
कौए के नकारात्मक संकेतों से बचने के उपाय
यदि छत पर कौआ बार-बार करकश आवाज में बोलता है या मन में किसी अनहोनी का भय हो, तो ये आसान उपाय किए जा सकते हैं. छत पर मिट्टी के बर्तन में पक्षियों के लिए पानी और थोड़ा दाना हमेशा रखें.
किसी भी शकुन-अपशकुन के प्रभाव को शांत करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें या अपने इष्टदेव का ध्यान करें. कौए के साथ-साथ काले कुत्ते या गाय को भोजन कराने से गृह दोष शांत होते हैं.
छत पर कौए का बोलना हमेशा संकट का प्रतीक नहीं होता. नारद संहिता के अनुसार यह प्रकृति का एक तरीका है जो हमें समय के प्रति सजग करता है. यदि कौआ पूर्व या उत्तर दिशा में बोले तो यह खुशहाली का संकेत है, और यदि वह दक्षिण दिशा में करकश आवाज में बोले तो यह सतर्क रहने की सलाह है. पक्षियों को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें दाना-पानी दें और घर में सकारात्मकता बनाए रखें.
FAQ
क्या छत पर कौए का बोलना मेहमान आने का संकेत है?
लोक मान्यता में शांत स्वर में कौए का बोलना किसी अतिथि या शुभ समाचार के आगमन से जोड़ा जाता है.
कौआ किस दिशा में बोले तो शुभ माना जाता है?
पूर्व, उत्तर और ईशान दिशा की ओर कौए का शांत स्वर में बोलना शुभ माना गया है.
कई कौओं का एक साथ चिल्लाना क्या बताता है?
प्रचलित शकुन मान्यताओं में इसे आसपास की अशांति या विवाद के प्रति सतर्क रहने का संकेत माना जाता है.
कौए को रोटी खिलाने से क्या होता है?
धार्मिक मान्यताओं में कौए को भोजन देना पितरों की तृप्ति और शनि से जुड़ी बाधाओं की शांति से जोड़ा जाता है.
क्या कौए का बोलना वैज्ञानिक रूप से भविष्य की घटना बताता है?
इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है. कौए भोजन, खतरे, क्षेत्र की रक्षा और दूसरे कौओं से संवाद करने के लिए भी आवाज निकालते हैं.
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