

नई दिल्ली:
पेपर लीक को रोकने के लिए सरकार पुराने कानून में संशोधन के लिए जो बिल लेकर आई है, उस पर मंगलवार को लोकसभा में चर्चा हुई. चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि पेपर लीक कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि ये परीक्षा प्रणाली में गहरी स्ट्रक्चरल खामियों को उजागर करती हैं.
उन्होंने कहा, ‘ध्यान पेपर लीक को रोकने पर होना चाहिए, न कि केवल घटना के बाद जिम्मेदार लोगों को सजा देने पर.’
उन्होंने आगे कहा, ‘इस बिल में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से 2 महीने के भीतर जांच और 3 महीने के भीतर मुकदमे पूरे करने का प्रस्ताव है. लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या न्यायिक प्रणाली में इन समय-सीमाओं को पूरा करने की क्षमता है.’
उन्होंने कहा कि केवल कानून पारित करने से ही त्वरित न्याय सुनिश्चित नहीं होगा. उन्होंने जजों और प्रॉसिक्यूटर की संख्या बढ़ाने, समय पर जांच करने और केस मैनेजमेंट में सुधार करने की मांग की.
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बोलने के लिए 9 मिनट का ही समय मिला
शशि थरूर को सिर्फ 9 मिनट ही बोलने का समय मिला. उन्होंने X पर पोस्ट कर बताया कि ‘आखिरकार, रात 10:40 बजे मुझे लोकसभा में ‘पेपर लीक संशोधन बिल’ पर बोलने का मौका मिला. समय की कमी के कारण मुझे अपनी बात बहुत संक्षेप में कहनी पड़ी, लेकिन मुझे मिले नौ मिनटों में मैंने कुछ अहम बातें रखीं. हालांकि इस दौरान चेयर बार-बार घंटी बजाती रही और आखिर में मेरा माइक भी बंद कर दिया गया.’
I finally got to speak in the LokSabha on the Paper Leaks Amendment Bill at 10:40 pm. I dramatically abbreviated my arguments for lack of time, but made a few crucial points in the nine minutes I was given, punctuated by the Chair ringing the bell repeatedly and even switching… pic.twitter.com/1hUHKBXjin
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) July 28, 2026
उन्होंने कहा कि ‘लेकिन मेरा मुख्य संदेश सीधा-सा था- यह बिल उन लोगों के लिए सजा बढ़ाता है जो हमारे बच्चों के सपनों का सौदा करते हैं, लेकिन असल जरूरत सिस्टम को ठीक करने की है ताकि यह अपराध हो ही न. मैंने इस दिशा में कई सुझाव भी दिए.’
इसके बाद बाहर निकलकर मीडिया से बात करते हुए थरूर ने कहा, ‘सवाल यह नहीं है कि किस पार्टी के कार्यकाल में ज्यादा पेपर लीक हुए. सवाल यह होना चाहिए कि सिस्टम खराब है. हम इसे कैसे ठीक करें? अगर कोई हमारे बच्चों के सपनों का सौदा कर रहा है, तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए. दस साल की जेल, 10 करोड़ रुपये का जुर्माना, या जो भी सजा तय की जाए, वह उन पर निर्भर करता है. लेकिन इसमें बहुत देर हो चुकी है. सजा तो सरकार की नाकामी और पेपर लीक हो जाने के बाद मिलती है. हमें ऐसे सिस्टम की जरूरत है जहां हम पेपर लीक को रोक सकें, न कि अपराध होने के बाद लोगों को सजा दें.’
#WATCH | Delhi | Congress MP Shashi Tharoor says, “In fact, the BJP speakers were the ones who kept giving examples of paper leaks under previous governments…The question is not which party presided over more paper leaks. The question should be: the system is broken; how do we… pic.twitter.com/ewUwC60Nqp
— ANI (@ANI) July 28, 2026
फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेपर लीक मामलों के ट्रायल को लेकर उन्होंने कहा कि ‘अगर आप आज हमारे देश में फास्ट-ट्रैक कोर्ट का रिकॉर्ड देखें, तो मौजूदा फास्ट-ट्रैक कोर्ट पहले से ही भारी बोझ तले दबे हैं. पिछले साल, उन्होंने 1.44 लाख मामले दर्ज किए और सिर्फ 66,000 मामलों का निपटारा किया. फास्ट-ट्रैक कोर्ट में ढाई लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं.’
थरूर ने आगे कहा, ‘आज एक फास्ट-ट्रैक मामला था, और CBI के सरकारी वकील पेश ही नहीं हुए. अब, अगर आप इसी तरह काम करेंगे, तो आपको वे नतीजे नहीं मिलेंगे जिनका वादा आप इस बिल में कर रहे हैं. जब 21 छात्रों ने आत्महत्या कर ली है, तो ये वे माता-पिता हैं जिन्होंने अपने बच्चों में अपनी सारी उम्मीदें लगाई थीं और अब वे पूरी तरह टूट चुके हैं. ये हमारे देश के भविष्य के सपने हैं जो टूट रहे हैं. हम इसे कभी भी हल्के में कैसे ले सकते हैं? लोगों को सजा देने के लिए कानून पास करना ही काफी नहीं है.’
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क्या है इस बिल में?
- ट्रायल: ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ में हर राज्य में पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का प्रस्ताव है.
- सजा: इस बिल में पेपर लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वालों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. संगठित अपराधों के लिए बिल में कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
- अभी क्या है कानून: मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए 3 से 5 साल तक की कैद का प्रावधान है, जबकि संगठित रूप से धोखाधड़ी और पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए 5 से 10 साल तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.
बुधवार को राहुल गांधी का भाषण
लोकसभा में पेपर लीक बिल पर बुधवार को भी चर्चा होगी. मंगलवार को चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाषण दिया था. जानकारी के मुताबिक, बुधवार को 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही चर्चा होगी. दोपहर 12:30 बजे लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी भाषण देंगे. इसके बाद दोपहर 2 बजे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह जवाब देंगे.





