मध्य प्रदेश

गुना में आरक्षण के खिलाफ सवर्ण समाज की जनाक्रोश रैली, अर्थी निकाली


मध्य प्रदेश के गुना में आरक्षण व्यवस्था में संशोधन, एट्रोसिटी एक्ट और यूजीसी से जुड़े प्रावधानों के विरोध में सवर्ण संघर्ष मोर्चा का आंदोलन बुधवार (9 सितंबर) को और तेज हो गया. पिछले एक सप्ताह से हनुमान चौराहे पर धरने पर बैठे मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने शहर में जनाक्रोश रैली निकाली. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सांसद, विधायक और केंद्र सरकार की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर विरोध जताया और राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा.

मुंडन कर जताया विरोध

रैली की शुरुआत शास्त्री पार्क से हुई. प्रदर्शन में शामिल कई कार्यकर्ताओं ने सबसे पहले अपना मुंडन कराया. उनका कहना था कि यह मुंडन उन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध है, जो उनकी नजर में उनकी समस्याएं नहीं सुन रहे हैं. इसके बाद सांसद, विधायक और केंद्र सरकार की दो प्रतीकात्मक अर्थियां तैयार की गईं, जिन्हें लेकर कार्यकर्ता शहर के अलग-अलग इलाकों से होते हुए हनुमान चौराहे तक पहुंचे.

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रैली के दौरान कुछ कार्यकर्ता अर्थी के आगे विलाप करते हुए चले, जबकि पीछे बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग नारेबाजी करते रहे. प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई.

हनुमान चौराहे पर पहुंचकर प्रतीकात्मक रूप से अर्थियों का अंतिम संस्कार भी किया गया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आगे पिंडदान और तेरहवीं जैसे कार्यक्रम भी किए जाएंगे.

कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम दिया ज्ञापन

हनुमान चौराहे से रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां सवर्ण संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और संशोधन की मांग की गई. साथ ही एट्रोसिटी एक्ट में बदलाव कर उसके कथित दुरुपयोग को रोकने और यूजीसी से जुड़े विवादित प्रावधानों को वापस लेने की मांग भी उठाई गई.

राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष संजीव सिंह तोमर ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, इसलिए प्रतीकात्मक रूप से उनकी अर्थी निकाली गई. उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

आरक्षण के विरोध में उठाई आवाज

रैली में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे आरक्षण व्यवस्था के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना था कि सवर्ण समाज के कई परिवार पीढ़ियों से पढ़ाई-लिखाई से जुड़े रहे हैं, लेकिन आरक्षण के कारण उन्हें समान अवसर नहीं मिल पाते.

उन्होंने कहा कि उनका विरोध किसी समाज के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर है. साथ ही उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे चाहते हैं कि सरकार भी उनकी बात शांति से सुने.

सवर्ण संघर्ष मोर्चा ने बुधवार को शहर बंद का भी आह्वान किया था. इसका असर शहर के कुछ बाजारों में देखने को मिला, जबकि कई जगह दुकानें सामान्य रूप से खुली रहीं. रैली के दौरान पुलिस और प्रशासन पूरे समय सतर्क रहा. कलेक्ट्रेट और रैली मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने.

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आगे भी जारी रहेगा आंदोलन

मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि आरक्षण, एट्रोसिटी एक्ट और यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा. हालांकि अगले कार्यक्रम की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है. संगठन का दावा है कि गुना के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग इस जनाक्रोश रैली में शामिल हुए.

Input By : मोहन बघेल



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