मध्य प्रदेश

चुड़ैल की रात: हिमाचल में आज से खौफ में कटेंगी 2 रातें, जानें क्या है वजह


विज्ञान और आधुनिकता के इस दौर में भी हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या से जुड़ी एक अनोखी लोक परंपरा आज भी जीवित है. इस पर्व को डगयाली, बड़ी डगयाली, उवांस-डुवांस या अघोरा चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है. लोक मान्यताओं के अनुसार इन दो रातों में नकारात्मक और अदृश्य शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसके कारण लोग विशेष सावधानी बरतते हैं.

सिरमौर, शिमला, मंडी, सोलन और कुल्लू के कुछ ग्रामीण इलाकों में डगयाली को आज भी रहस्य और भय से जुड़ी रात माना जाता है. लोक विश्वास है कि इन दिनों डायन, भूत-प्रेत, डाकनी-शाकनी और अन्य अदृश्य शक्तियां सक्रिय रहती हैं. इसी कारण लोग रात्रि में अनावश्यक रूप से घरों से बाहर निकलने से बचते हैं.

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क्या है डगयाली से जुड़ी मान्यता ?

मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर तांत्रिक साधनाएं भी की जाती हैं. शास्त्रों में इसे कुशाग्रहणी अमावस्या तथा अघोरा चतुर्दशी के रूप में भी वर्णित किया गया है. लोक कथाओं में कहा जाता है कि इन रातों में काली शक्तियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, हालांकि इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है.

सिरमौर क्षेत्र में डगयाली से जुड़ी विशेष लोक परंपराएं देखने को मिलती हैं. यहां डगयाली के अवसर पर ‘अदृश्य डगयाली नृत्य’ की लोककथाएं प्रचलित हैं. मान्यता है कि इस रहस्यमयी नृत्य को सामान्य व्यक्ति नहीं देख सकता, बल्कि केवल तांत्रिक या देव परंपराओं से जुड़े गुरु ही इसका अनुभव कर सकते हैं.

लोग करते हैं विशेष उपाय

इन मान्यताओं के चलते लोग अपने घरों, पशुशालाओं और खेतों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करते हैं. पुरोहितों द्वारा अभिमंत्रित चावल या सरसों का छिड़काव किया जाता है तथा भेखल और टिंबर की टहनियां घरों के दरवाजों और खिड़कियों पर लगाई जाती हैं. माना जाता है कि इससे नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है.

हालांकि, आधुनिक समाज में इन मान्यताओं को लोक संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा माना जाता है, फिर भी हिमाचल के कई गांवों में डगयाली आज भी श्रद्धा, रहस्य और लोकविश्वास का अनूठा संगम बनी हुई है.

डॉ मस्त राम का कहना है कि बुधवार बारह बजे के बाद डायाग्ली शुरू हो जाएगी जो गुरुवार सुबह दस बजे तक खत्म हो जाएगी, इसलिए इसका ज्यादा प्रभाव बुधवार को ही रहेगा. हिमाचल के अधिकतर लोग इस रात बुरे साये से बचने के लिए कई उपाय करते हैं.

 



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