

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि एक ‘स्वस्थ भारत’ की मजबूत नींव, ‘स्वस्थ बचपन’ पर ही रखी जा सकती है. पीएम मोदी के इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए और ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार बच्चों व किशोर-किशोरियों की हेल्थकेयर सुविधाओं को और ज्यादा स्मार्ट, सस्टेनेबल और फैमिली एवं चाइल्ड फ्रेंडली बनाने के लिए ‘हेल्थ पासपोर्ट’ का कॉन्सेप्ट लेकर आई है.
स्कूल हेल्थ -राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SH-RBSK) के तहत अब गुजरात में जन्म से 18 साल तक के हर बच्चे का अपना एक हेल्थ पासपोर्ट होगा. यह सिर्फ कोई सामान्य हेल्थ कार्ड नहीं, बल्कि बच्चे की जन्म से लेकर किशोरावस्था तक की पूरी स्वास्थ्य यात्रा का एक पक्का डॉक्यूमेंट होगा. इस राज्यव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत 27 जून 2026 को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा की गई.
1.89 करोड़ बच्चों के पास होगा अपना ‘हेल्थ पासपोर्ट’
गुजरात में SH-RBSK के तहत हर साल लगभग 1.89 करोड़ बच्चों का हेल्थ चेकअप 992 मोबाइल हेल्थ टीमों द्वारा किया जाता है. फिलहाल इन चेकअप्स का रिकॉर्ड डिजिटल पोर्टल पर तो मौजूद है, लेकिन माता-पिता या बच्चों के पास ऐसा कोई हैंडी डॉक्यूमेंट नहीं होता, जिसे वे रेगुलर रूटीन चेकअप, इलाज या फॉलो-अप के लिए आसानी से इस्तेमाल कर सकें. प्रस्तावित ‘हेल्थ पासपोर्ट’ इसी कमी को दूर करेगा और बच्चों के मेडिकल रिकॉर्ड्स को एक सिस्टमैटिक और आसान फॉर्मैट में पेश करेगा.
आसान होगी हेल्थ पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया
लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया को बेहद सरल रखा गया है. बच्चों का हेल्थ पासपोर्ट बनवाने के लिए माता-पिता को कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी. SH-RBSK की मोबाइल हेल्थ टीमों द्वारा आंगनवाड़ी, स्कूल, मदरसा, गुरुकुल और स्पेशल स्कूलों में बच्चों की हेल्थ स्क्रीनिंग की जाएगी. स्क्रीनिंग और डिजिटल प्लैटफॉर्म पर डेटा एंट्री के बाद बच्चों को यह हेल्थ पासपोर्ट वहीं दे दिया जाएगा. इतना ही नहीं, इसके रिन्यूअल की व्यवस्था भी स्पष्ट है. 5 साल तक के बच्चों या स्कूल न जाने वाले बच्चों के हेल्थ पासपोर्ट को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के मेडिकल ऑफिसर (MO) द्वारा हर साल रिन्यू किया जाएगा. वहीं, स्कूली छात्रों के लिए यह जिम्मेदारी स्कूल के प्राचार्य निभाएंगे.
यह हेल्थ पासपोर्ट हर बच्चे की पर्सनल मेडिकल हिस्ट्री का एक मास्टर डॉक्यूमेंट होगा. इसमें बच्चे की बेसिक डिटेल्स के साथ जन्म से 18 साल तक के उम्र-वार हेल्थ चेकअप का पूरा रिकॉर्ड दर्ज रहेगा. इसके अलावा, स्कूल हेल्थ-राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SH-RBSK) के तहत फोकस की जाने वाली चार प्रमुख कैटेगरीज (4D) यानी जन्मजात डिफेक्ट्स, बीमारियां, न्यूट्रिशन की कमी और डेवलपमेंट में देरी या विकलांगता का पूरा अपडेट इसमें शामिल होगा. यही नहीं, बच्चे की शारीरिक-मानसिक वृद्धि व विकास, पोषण का स्तर, रेफरल सर्विसेज, पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े टिप्स, लाइफस्टाइल एडवाइस और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर भी इस पासपोर्ट का हिस्सा होंगे. आसान शब्दों में कहें तो परिवारों को बच्चे की सेहत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी एक ही जगह मिल जाएगी.
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