
Onam 2026: केरल और दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला ओणम केवल फसल और खुशहाली का त्योहार नहीं है, बल्कि इसका संबंध भगवान विष्णु के वामन अवतार और असुरराज महाबली की कथा से भी जोड़ा जाता है. आज ओणम मनाया जा रहा है.
हर साल ओणम के दौरान महाबली के पृथ्वी पर आने की मान्यता है. लेकिन सवाल यह है कि जब भगवान विष्णु ने वामन रूप में महाबली को पाताल लोक भेज दिया था, तो फिर उन्हें हर साल अपने राज्य और प्रजा के बीच लौटने का वरदान क्यों मिला?
कौन थे राजा महाबली?
पौराणिक कथा के अनुसार महाबली असुर वंश के राजा थे, लेकिन वे अपनी प्रजा के बीच बेहद लोकप्रिय थे. उन्हें दानी, न्यायप्रिय और वचन निभाने वाला राजा माना जाता था. उनकी प्रजा सुखी थी और राज्य में किसी तरह का भेदभाव नहीं था. महाबली की बढ़ती शक्ति और यश के कारण देवताओं को चिंता होने लगी.
महाबली ने एक बड़ा यज्ञ आयोजित किया. इसी दौरान भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और एक छोटे ब्राह्मण के रूप में यज्ञ स्थल पर पहुंचे. उन्होंने महाबली से केवल तीन पग भूमि मांग ली.
तीन पग में नाप लिया पूरा संसार
महाबली ने वामन की मांग स्वीकार कर ली. इसके बाद वामन ने विराट रूप धारण कर लिया. पहले पग में उन्होंने पृथ्वी, दूसरे पग में आकाश नाप लिया. अब तीसरे पग के लिए कोई स्थान शेष नहीं था.
महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया और कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रख दिया जाए. भगवान विष्णु महाबली के इस समर्पण और वचनबद्धता से प्रसन्न हुए. तीसरा पग उनके सिर पर रखकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया.
फिर विष्णु जी ने दिया लौटने का वरदान
महाबली की भक्ति, दानशीलता और प्रजा के प्रति प्रेम से भगवान विष्णु प्रसन्न थे इसलिए उन्हें केवल दंड देकर दूर नहीं किया गया. धार्मिक कथा के अनुसार महाबली ने भगवान से अपनी प्रजा से मिलने की इच्छा व्यक्त की.
भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे हर वर्ष एक बार अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आ सकेंगे. इसे ओणम से जोड़ा जाता है.
ओणम पर महाबली के स्वागत की परंपरा
केरल में मान्यता है कि ओणम के दौरान राजा महाबली अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए पृथ्वी पर आते हैं. इसी वजह से लोग घरों की सफाई करते हैं, दरवाजे पर फूलों की पुक्कलम सजाते हैं, पारंपरिक पकवान बनाते हैं और उत्साह से त्योहार मनाते हैं.
ओणम के दिनों में महाबली का स्वागत उत्सव की तरह किया जाता है. यह त्योहार पौराणिक कथा, प्रकृति, फसल, परिवार और सामुदायिक खुशियों को एक साथ जोड़ता है.
एक घर में सास और बहू दोनों रखें वरलक्ष्मी व्रत तो कलश एक होगा या अलग? जानें पूजा का नियम
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
