
28 अगस्त 2026 की श्रावण पूर्णिमा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाली है. इस दिन जहां देशभर में रक्षाबंधन पर भाई-बहन के प्रेम और रक्षा, वहीं भारत के अलग- अलग हिस्सों में नारली पूर्णिमा, लक्ष्मी-नारायण पूजा, श्रावणी उपाकर्म और संस्कृत दिवस भी मनाए जाएंगे.
एक ही पूर्णिमा पर कहीं समुद्र पूजा होगी, कहीं वेदों और ज्ञान की परंपरा का उत्सव और कहीं भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाएगा. 28 अगस्त को मनाए जाने वाले इन पर्वों का धार्मिक महत्व क्या है और किन क्षेत्रों में कौन-सी परंपरा निभाई जाती है आइए जानते हैं.
रक्षाबंधन
भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाया जाता है. बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उसके सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायु और मंगल की कामना करती है. इस दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक है. इस बार भद्रा मुक्त रक्षाबंधन मनाया जाएगा.
नारली पूर्णिमा
महाराष्ट्र, गोवा और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में श्रावण पूर्णिमा को नारली पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. खासकर भारत के महाराष्ट्र एवं कोंकणी क्षेत्र के अलावा गोवा, गुजरात के समुद्र तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों के लिए ये दिन बहुत खास हैं. मछुआरा समुदाय इस दिन समुद्र की पूजा करता है और समुद्र को नारियल अर्पित करता है. इसे समुद्र के प्रति आभार प्रकट करते हैं.
श्रावणी उपाकर्म
श्रावण पूर्णिमा का संबंध उपाकर्म से भी है. वैदिक परंपरा में इस दिन विशेष रूप से ब्राह्मण वेदाध्ययन के नए चक्र की शुरुआत, ऋषि तर्पण और यज्ञोपवीत बदलने जैसे संस्कार करते हैं. दक्षिण भारत में इसे अवणी अवित्तम के नाम से जाना जाता है. ये पूर्णिमा केवल पारिवारिक पर्व नहीं, बल्कि वेद, ऋषि और ज्ञान परंपरा से भी जुड़ी है.
संस्कृत दिवस
श्रावण पूर्णिमा को भारत में संस्कृत दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है. श्रावण पूर्णिमा का संबंध वेदाध्ययन और गुरु-शिष्य परंपरा से रहा है। इसी वजह से इस दिन को संस्कृत और वैदिक ज्ञान के उत्सव के रूप में महत्व मिला है.
भगवान विष्णु और लक्ष्मी की उपासना
सावन पूर्णिमा पर घर-घर में लक्ष्मीनायारण की पूजा का विधान है. इस दिन सत्यनारायण कथा करना चाहिए साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य दें. स्नान, दान, जप और पूजा के लिए ये दिन विशेष है.
FAQ
- 28 अगस्त 2026 को कौन-कौन से पर्व मनाए जाएंगे?
28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन के साथ नारली पूर्णिमा, श्रावणी उपाकर्म, संस्कृत दिवस और लक्ष्मी-नारायण पूजा जैसे पर्व एवं धार्मिक परंपराएं निभाई जाएंगी. - नारली पूर्णिमा किन राज्यों में मनाई जाती है?
नारली पूर्णिमा मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गोवा और कोंकण क्षेत्र में मनाई जाती है. समुद्र तटीय इलाकों में मछुआरा समुदाय समुद्र की पूजा कर नारियल अर्पित करता है. - श्रावणी उपाकर्म क्या है?
श्रावणी उपाकर्म वैदिक परंपरा से जुड़ा संस्कार है. इस दिन वेदाध्ययन के नए चक्र की शुरुआत, ऋषि तर्पण और यज्ञोपवीत परिवर्तन जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं. दक्षिण भारत में इसे अवणी अवित्तम भी कहा जाता है. - संस्कृत दिवस श्रावण पूर्णिमा को ही क्यों मनाया जाता है?
श्रावण पूर्णिमा का संबंध प्राचीन समय से वेदाध्ययन और गुरु-शिष्य परंपरा से रहा है. इसी कारण इस दिन संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए संस्कृत दिवस मनाया जाता है.
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