
Raksha Bandhan Rules: रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्यार और सुरक्षा के वादे का सबसे बड़ा त्योहार है. हर साल बहनें इस दिन का बेसब्री से इंतजार करती हैं, लेकिन कई बार त्योहार के दिन ही पीरियड्स (मासिक धर्म) शुरू हो जाते हैं. ऐसे में अक्सर बहनों के मन में यह सवाल आता है कि क्या वे पीरियड्स में अपने भाई को राखी बांध सकती हैं?
धार्मिक मान्यता और पूजा-पाठ से जुड़ा नियम
सनातन परंपरा और शास्त्रों में मासिक धर्म को एक सामान्य प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया माना गया है. हालांकि, इस दौरान शरीर को आराम देने और ऊर्जा के संतुलन के लिए पूजा-पाठ, मंदिर जाने और धार्मिक कर्मकांडों से दूर रहने की सलाह दी जाती है.
ईश्वर की पूजा से परहेज: रक्षाबंधन पर सबसे पहले कुलदेवता, लड्डू गोपाल या भगवान गणेश को राखी चढ़ाई जाती है. पीरियड्स के दौरान महिलाओं को सीधे भगवान की मूर्ति छूने या पूजा की थाली तैयार करने से बचना चाहिए.
रक्षाबंधन का मूल भाव: रक्षाबंधन कोई कठिन कर्मकांड नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है. इसलिए इसमें भावनाएं और आपसी स्नेह सबसे ऊपर माने जाते हैं.
पीरियड्स में राखी बांधने का सबसे आसान और सही तरीका
अगर रक्षाबंधन के दिन आपको पीरियड्स हैं, तो त्योहार से दूर रहने या निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आप कुछ आसान तरीकों को अपनाकर आसानी से भाई को राखी बांध सकती हैं:
- पूजा की थाली किसी और से सजवाएं: पूजा की थाली तैयार करने, दीपक जलाने और भगवान को पहली राखी अर्पित करने का काम घर की किसी अन्य महिला (जैसे मां या भाभी) से करवा लें.
- स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें: स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें. मन में सकारात्मक भाव रखें.
- सीधे भाई को बांधें राखी: आप स्वयं भाई के माथे पर रोली-चावल का टीका लगा सकती हैं और उसकी कलाई पर प्यार से राखी बांध सकती हैं.
- मिठाई खिलाएं और आशीर्वाद लें: आप अपने हाथों से भाई को मिठाई खिला सकती हैं और उससे रक्षा का आशीर्वाद व प्यार ले सकती हैं.
बदलती सोच और ज्योतिषाचार्यों की राय
आज के समय में कई विद्वानों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, कोई दोष या अपवित्रता नहीं. प्राचीन समय में महिलाओं को इस दौरान शारीरिक दर्द, कमजोरी और थकान से आराम देने के लिए घरेलू व धार्मिक कामों से अलग रखा जाता था.
रक्षाबंधन पूरी तरह से भाई के प्रति बहन के मंगल भाव और सुरक्षा की कामना पर टिका है. यदि आपके मन में भाई के लिए शुद्ध प्रेम और शुभकामनाएं हैं, तो राखी बांधने में कोई रुकावट नहीं आती.
अगर आप पूरी तरह पारंपरिक नियमों का पालन करना चाहती हैं, तो सिर्फ मुख्य देव-पूजा से दूरी बनाकर बाकी सभी रस्में खुशी-खुशी निभा सकती हैं. प्रेम और सुरक्षा के इस पावन रिश्ते में किसी भी प्राकृतिक नियम की वजह से दूरी लाने की आवश्यकता नहीं है.
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