

क्या आपको अक्सर कमर दर्द की परेशानी रहती है? क्या आप गले के दर्द से परेशान हैं? अगर हां, तो आपके लिए काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट थेरेपी काफी असरदार हो सकती है. नियमित रूप से अगर आप एक्सपर्ट की सलाह पर काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट कराते हैं, तो इससे काफी हद तक कमर दर्द की परेशानी दूर हो सकती है. हालांकि, इस बात का भी ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की स्थिति अलग-अलग होती है, तो ऐसे में इसका असर भी अलग-अलग हो सकता है. यहां जानते हैं काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट के बारे में विस्तार से-
क्या है काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट?
काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट एक ऐसी थेरेपी है, जिसमें काइरोप्रैक्टर अपने हाथों या विशेष उपकरणों की मदद से रीढ़ और ज्वाइंट्स पर नियंत्रित दबाव डालते हैं. इस थेरेपी को करने का उद्देश्य रीढ़ की मूवमेंट बेहतर करना और दर्द कम करना होता है. इसे स्पाइनल मैनिपुलेशन भी कहा जाता है. यह थेरेपी कमर दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए काफी असरदार मानी जाकती है.
काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट के दौरान क्या होता है?
- जब भी आप काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट कराने जाते हैं, तो पहली मुलाकात में काइरोप्रैक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री पूछते हैं.
- इसके बाद रीढ़ और जोड़ों की जांच की जाती है.
- जरूरत पड़ने पर एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई कराया जा सकता है.
- मरीज को आमतौर पर एक गद्देदार टेबल पर लिटाया जाता है.
- इसके बाद काइरोप्रैक्टर रीढ़ के खास हिस्सों पर तेज लेकिन नियंत्रित दबाव डालते हैं.
इस थेरेपी के दौरान पॉप या क्रैक जैसी आवाज सुनाई दे सकती है. ऐसी आवाज आना काफी कॉमन है. यह जोड़ों में मौजूद गैसों (ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि) के निकलने से होती है.
काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट कराने के बाद कैसा होता है महसूस?
काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट के बाद कुछ लोगों को हल्का दर्द या अकड़न, सिरदर्द और थकान जैसा फील होता है. लेकिन ये लक्षण 24 घंटे के अंदर अपने आप ठीक हो जाते हैं.
काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट के क्या हैं फायदे?
इस थेरेपी को कराने से कुछ परेशानियों से राहत मिल सकती है, जैसे-
- कमर दर्द
- गर्दन दर्द
- सिरदर्द
- साइटिका
हालांकि, इसे लेकर अभी भी कुछ रिसर्च बाकी हैं, तो ये पूरी तरह साबित नहीं हुआ है कि ये सभी मरीजों के लिए प्रभावी है.
क्या कमर दर्द में फायदा होता है?
कुछ रिसर्चर्स का कहना है कि काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट से कमर दर्द में हल्का सुधार हो सकता है. कुछ मामलों में ये दर्द निवारक दवाओं, खासकर ओपिओइड्स का विकल्प भी बन सकता है.
काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट के क्या हैं नुकसान?
अधिकतर लोगों के लिए ये थेरेपी पूरी तरह से सुरक्षित होती है, लेकिन कुछ लोगों को इस थेरेपी के बाद कुछ परेशानियां जैसे- दर्द बढ़ना, अकड़न और सिरदर्द हो सकती है. वहीं, कुछ दुर्लभ मामलों में गंभीर परेशानियां जैसे- स्लिप डिस्क (Herniated Disc), स्ट्रोक और नसों से जुड़ी समस्याएं भी होने का खतरा रहता है.
किन लोगों को काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट थेरेपी नहीं करानी चाहिए?
कुछ परेशानियों में एक्सपर्ट काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट न कराने की सलाह देते हैं, जैसे-
- हाथ या पैर में सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी
- ऑस्टियोपोरोसिस की परेशानी
- रीढ़ की हड्डी का कैंसर
- स्ट्रोक का अधिक खतरा
- गर्दन की हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्या, इत्यादि.
ये भी पढ़ें – 60 की उम्र में भी रहना है फिट? एक्सपर्ट ने बताया 10 मिनट का आसान रूटीन, कमर दर्द और शरीर की जकड़न होगी गायब!





