
आज हम खुश होने से पहले सोचते हैं कि लोग क्या कहेंगे. कितने लाइक आए, किसने स्टोरी देखी और किसने जवाब नहीं दिया धीरे-धीरे ये चीजें हमारी खुशी तय करने लगती हैं. लेकिन श्रीकृष्ण की सीख कुछ और है. अपना ध्यान कर्म पर रखिए, लोगों की प्रतिक्रिया पर नहीं. हर कदम के लिए दूसरों की मंजूरी जरूरी नहीं होती.

सोशल मीडिया ने हमें ऐसा बना दिया है कि जिंदगी का हर अच्छा पल दुनिया को दिखाना जरूरी लगता है. लेकिन हर खुशी पोस्ट करने के लिए नहीं होती. कुछ पल सिर्फ खुद के लिए भी होने चाहिए. श्रीकृष्ण की सीख हमें भीतर का संतुलन बनाए रखना सिखाती है. जो सुकून दिल को मिले, उसे लाइक और कमेंट की जरूरत नहीं.

किसी ने आपका संदेश पढ़कर जवाब नहीं दिया, आपकी पोस्ट पर लाइक नहीं किया या आपको नजरअंदाज कर दिया इसका मतलब ये नहीं कि आपकी कीमत कम हो गई. हर इंसान की अपनी जिंदगी और अपनी प्राथमिकताएं होती हैं. अपनी मानसिक शांति किसी दूसरे के जवाब के भरोसे मत छोड़िए. आपकी कीमत किसी के व्यवहार से तय नहीं होती.

किसी की नई नौकरी, खूबसूरत रिश्ता या घूमने की तस्वीरें देखकर लगता है कि सबकी जिंदगी हमसे बेहतर है. लेकिन हम उनकी पूरी जिंदगी नहीं, सिर्फ चुने हुए अच्छे पल देखते हैं. गीता की सीख हमें अपने कर्म और अपने रास्ते पर ध्यान देने की प्रेरणा देती है. किसी और की जिंदगी देखकर अपनी मेहनत और सफर को छोटा मत समझिए.

लगातार रील्स देखना, सूचनाएं चेक करना और दूसरों की जिंदगी से अपनी जिंदगी की तुलना करना दिमाग को थका देता है. कभी फोन एक तरफ रखकर खुद के साथ बैठना भी जरूरी है. श्रीकृष्ण का कर्मयोग हमें वर्तमान में रहने की सीख देता है. हर वक्त दुनिया से जुड़े रहने के बजाय कुछ समय खुद को समझने में लगाइए.

आपको कितने लोग पसंद करते हैं, इससे आपकी असली कीमत तय नहीं होती. आपका चरित्र, आपकी मेहनत और मुश्किल समय में आपका व्यवहार आपकी पहचान बनाता है. अगली बार जब आपको दूसरों की मंजूरी की जरूरत महसूस हो, तो खुद से पूछिए “क्या मैं सही रास्ते पर हूं?” अगर जवाब हां है, तो हर किसी की मंजूरी जरूरी नहीं.
Published at : 09 Aug 2026 06:05 AM (IST)

