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‘सच दबाया नहीं जा सकता’, तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल की सजा पर बेटी ने क्या कहा? | Tarun Tejpal Case Update Kara Tejpal Defends Father Against Allegations After Bombay High Court Verdict



नई दिल्ली:

तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट से 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद अब उनकी बेटी कारा तेजपाल पिता के बचाव में खुलकर सामने आ गई हैं. कारा ने इस पूरे मामले को तहलका की खोजी पत्रकारिता से जोड़ते हुए इसे सत्ता की तरफ से उन्हें खामोश करने की साजिश बताया है. 

उन्होंने कहा कि उनके पिता को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह सरकार के लिए एक बड़ा कांटा बन चुके थे और उन्हें चुप कराने का सबसे आसान तरीका उन्हें समाज की नजरों में एक गुनहगार के तौर पर पेश करना था. 

शनिवार को जारी एक बयान में कारा ने कहा, “अब मैं 23 साल की वह लड़की नहीं रही. मैं अब 36 साल की हो चुकी हूं और मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई मुझे ‘रेप अपोलॉजिस्ट’ कहता है या ‘रेपिस्ट की बेटी’ या मेरे खिलाफ किसी भी तरह का घटिया शब्द इस्तेमाल करता है.”

13 साल तक देखा सबूत, पिता पूरी तरह बेकसूर हैं: कारा

कारा ने बताया कि जब उनके पिता को गिरफ्तार किया गया था तब वह 23 साल की थीं. जब 2021 में निचली अदालत से वे बरी हुए तब वह 31 साल की थीं और आज 36 साल की उम्र में जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है, तब भी वह अपने पिता के साथ चट्टान की तरह खड़ी हैं.

कारा का दावा है कि उन्होंने बीते 13 सालों तक इस केस से जुड़े हर एक सबूत और दस्तावेज को खुद गहराई से देखा और समझा है. इसके बाद ही वह इस नतीजे पर पहुंची हैं कि उनके पिता पूरी तरह से बेकसूर हैं और उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं. 

मैं किसी समाज के डर से चुप रहने वाली नहीं: कारा

कारा ने कहा कि शुरुआत में वह सच बोलने से डरती थीं और मीडिया कवरेज ने उनके परिवार को मानसिक तौर से काफी तोड़ा, लेकिन अब वह किसी आलोचना या समाज के डर से चुप रहने वाली नहीं हैं.

मीडिया और सार्वजनिक बहस पर निशाना साधते हुए कारा ने कहा कि इस पूरे मामले में एक खास तरह का माहौल बनाया गया ताकि लोग आरोपों पर सवाल ना उठा सकें. 

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल हेडलाइंस और भ्रामक जानकारियों पर भरोसा करने के बजाय मामले के असली तथ्यों और कागजातों को पढ़ें.

हाईकोर्ट ने फैसले में क्या कहा?

बता दें कि गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने साल 2021 के ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) के फैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी.

हाईकोर्ट ने तेजपाल को 2013 में गोवा के एक फाइव स्टार होटल में आयोजित ‘थिंकफेस्ट’ सम्मेलन के दौरान अपनी एक जूनियर सहकर्मी के साथ बलात्कार करने का दोषी पाया.

जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की पीठ ने निचली अदालत के फैसले पर कहा कि ट्रायल कोर्ट का सबूतों को देखने का नजरिया ना केवल अनुचित था बल्कि उसमें गंभीर कमियां थीं. 

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि निचली अदालत का फैसला पूर्वग्रहों और इस गलत धारणा पर आधारित था कि एक पीड़िता को घटना के वक्त शारीरिक रूप से कैसा विरोध करना चाहिए या बाद में कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए. कोर्ट ने इस दौरान परफेक्ट विक्टिम का धारणा को भी खारिज कर दिया था. 

परफेक्ट विक्टिम ऐसे पीड़ित को कहते हैं जो वारदात के बाद डरा-सहमा दिखे, रोये या उदास दिखे. कोर्ट ने माना है कि कई बार पीड़ित अपराध होने के काफी वक्त बाद समझ पाता है कि उसके साथ हुआ क्या है. इससे पहले निचली अदालत ने इस केस में कहा था कि अपराध के बाद पीड़िता को हाव-भाव को देखकर नहीं लगता कि उसके साथ अपराध हुआ है.

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