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स्कूली छात्राओं के सामने 2 घंटे तक पोस्टमार्टम, क्‍या यह सही है, जानिए नियम  | satna hospital mortuary school girls present during postmortem 



सतना: मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल से नियमों और चिकित्सा नैतिकता की धज्जियां उड़ाने वाली घटना सामने आई है. अस्पताल की मर्चुरी (शवगृह) में डॉक्टरों ने सभी नियमों को दरकिनार करते हुए स्कूल यूनिफॉर्म में मौजूद दो छात्राओं की उपस्थिति में एक शव (कंकाल) का पोस्टमार्टम कराया गया. यह प्रक्रिया करीब पौने दो घंटे तक चली, इस दौरान छात्राएं, वहां मौजूद रही. जिससे अस्पताल प्रशासन और फॉरेंसिक फॉरमैट पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

पौने दो घंटे मर्चुरी में मौजूद रहीं छात्राएं

घटना शुक्रवार 7 अगस्‍त दोपहर की है, जब लगभग 1:45 बजे मर्चुरी में पोस्टमार्टम शुरू हुआ और दोपहर 3:35 बजे मेडिकल टीम बाहर निकली. इस दौरान पन्ना जिले के नरदहा निवासी दुर्गेश (पिता बेटू सिंह) के शव का परीक्षण किया जा रहा था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परीक्षण कक्ष में मेडिकल कॉलेज के डॉ. प्रतीक शुक्ला और उनकी टीम मौजूद थी. साथ ही, स्कूल यूनिफॉर्म पहनी दो छात्राएं भी शुरू से अंत तक वहीं मौजूद रहीं.

क्या कहते हैं कानूनी और मेडिकल नियम?

भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और फॉरेंसिक मेडिकल मैनुअल के अनुसार, पोस्टमार्टम कक्ष एक प्रतिबंधित क्षेत्र होता है. वहां केवल अधिकृत डॉक्टर, फॉरेंसिक एक्सपर्ट और जांच अधिकारी ही मौजूद रह सकते हैं. स्कूली बच्चों का मर्चुरी के भीतर प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है. मानव शरीर रचना समझाने के लिए स्कूलों में 3D मॉडल या चार्ट का उपयोग होता है, वास्तविक शव परीक्षण केवल फॉरेंसिक या एमबीबीएस के वयस्क छात्रों के लिए होता है. क्षत-विक्षत शव देखने से बच्चों पर मानसिक आघात पहुंच सकता है. इसके अलावा, मर्चुरी में फैले खतरनाक बैक्टीरिया और रसायनों से बच्चों में गंभीर संक्रमण का खतरा रहता है.

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जिम्मेदारों ने की पल्ला झाड़ने की कोशिश

एमएलबी स्कूल प्राचार्य (शीला सिंह): “शुक्रवार को हाफ-डे था. स्कूल प्रबंधन की ओर से किसी भी छात्रा को मर्चुरी जाने की अनुमति नहीं दी गई थी. यदि छात्राएं बिना बताए गई हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर परिजनों को सूचित किया जाएगा.”

मेडिकल कॉलेज डीन (डॉ. एस. पी. गर्ग): “स्कूली बच्चों को पोस्टमार्टम दिखाने या प्रशिक्षण देने का कोई नियम नहीं है. मर्चुरी में केवल एमबीबीएस छात्रों को अनुमति मिलती है. अगर स्कूली छात्राएं वहां मौजूद थीं, तो इसकी पूरी जानकारी जुटाई जाएगी.”

वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी (डॉ. महेंद्र सिंह): “पोस्टमार्टम रूम पूरी तरह प्रतिबंधित क्षेत्र है. बिना अनुमति प्रवेश करना अनुचित है.”

सीएमएचओ (डॉ. मनोज शुक्ला): “मर्चुरी में किसी बाहरी व्यक्ति या छात्रों के प्रशिक्षण का कोई शेड्यूल नहीं है. ड्यूटी स्टाफ के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति की उपस्थिति नियमों का उल्लंघन है.”

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