मध्य प्रदेश

Explained: सिंहस्थ 2028 की तैयारी के बीच जानिए उज्जैन में अबतक कितने धार्मिक स्थल हटाए गए


मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारियों के तहत चलाए जा रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के दौरान 28 सितंबर 2026 को तनाव की स्थिति पैदा हो गई. कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर के बीच लगभग 900 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के दायरे में आ रही ऐतिहासिक शाही मस्जिद के आगे के हिस्से और मीनार को हटाने की प्रक्रिया के विरोध में स्थानीय निवासियों और पुलिस के बीच तीखी बहस और पथराव की घटना हुई.

झड़प और पुलिस कार्रवाई!

पुलिस के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्वों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव की खबर आई. स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. घटना के सिलसिले में 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया और अफवाह फैलाने के आरोप में 5 कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

शहर के पुलिस अधीक्षक (SP) और प्रशासनिक अधिकारियों और शहर काजी खलील उर रहमान ने बताया कि प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच रात में ही आपसी सहमति से मामला सुलझ गया था और मस्जिद का निर्धारित हिस्सा हटाने का कार्य समझौते के तहत ही किया जा रहा है.

दरअसल मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 की भव्य और सुरक्षित तैयारियों को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश शासन, उज्जैन नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण अभियान चलाया जा रहा है. सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 में देश-विदेश से लगभग 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के आगमन का अनुमान लगाया गया है. इस विशाल जनसमूह के आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए शहर की संकरी सड़कों, विशेषकर महाकाल मंदिर क्षेत्र, गोपाल मंदिर, केडी गेट, कोयला फाटक, कंठाल चौराहा, छत्री चौक और ढाबा रोड जैसे व्यस्ततम मार्गों को चौड़ा किया जा रहा है.

सड़क चौड़ीकरण परियोजना, एलाइनमेंट के दायरे में आए धार्मिक स्थलों जिनमें मंदिर, मस्जिद, मजार सभी शामिल है उनको लेकर चर्चा विवाद सब जारी है. आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से.

प्रभावित धार्मिक स्थलों के आंकड़े और विस्थापन की स्थिति

शहर के प्रमुख व्यावसायिक एवं ऐतिहासिक मार्गों को 12 मीटर से बढ़ाकर 15 मीटर और कुछ मुख्य मार्गों को 24 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में सड़क सीमा के भीतर आने वाले कई छोटे-बड़े धार्मिक और सार्वजनिक ढांचे प्रभावित हुए हैं.

आजतक ने अपनी एक्सक्लूसिव पड़ताल में दावा किया है कि सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आ रहे कई प्राचीन मंदिरों को तोड़ा नहीं गया, बल्कि उन्हें पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए पीछे खिसकाया गया है.  प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से अब तक 12 धर्मस्थलों को हटाया जा चुका है.

कुल प्रभावित धार्मिक स्थल

उज्जैन नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा कराए गए विस्तृत सर्वे के अनुसार, विभिन्न चौड़ीकरण परियोजनाओं के अंतर्गत शहर भर में 50 से अधिक धार्मिक स्थल (मंदिर, मस्जिद के आंशिक हिस्से, मजारें और चबूतरे) सड़क के एलाइनमेंट के दायरे में चिन्हित किए गए हैं.

मार्गवार स्थिति और आंकड़े

कोयला फाटक से गोपाल मंदिर मार्ग (730 मीटर से 1.8 किमी पैच)

इस व्यस्त मार्ग पर कुल 15 धार्मिक स्थल सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आए. प्रशासन, स्थानीय निवासियों और संबंधित धार्मिक कमेटियों के बीच हुई बैठकों के बाद 12 धार्मिक स्थलों को आपसी सहमति से सफलतापूर्वक विस्थापित किया जा चुका है.

शेष 2 से 3 धार्मिक ढांचों के विस्थापन के लिए नगर निगम द्वारा टंकी चौराहा स्थित ज़मीन को नए धार्मिक परिसर के रूप में चिन्हित कर तैयार किया जा रहा है.

वीडी मार्केट से छोटी पुलिया मार्ग

इस मार्ग के चौड़ीकरण में कुल 11 धार्मिक स्थल चिन्हित किए गए हैं, जिनके पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है.  

खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक मार्ग

इस मार्ग के एलाइनमेंट में 15 धार्मिक स्थल चिन्हित किए गए हैं.

गोपाल मंदिर मार्ग और छत्री चौक की ताजा स्थिति

छत्री चौक से कंठाल चौराहे और गोपाल मंदिर के बीच 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की कार्रवाई सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है. उज्जैन का ऐतिहासिक द्वारकाधीश गोपाल मंदिर, जिसका निर्माण 19वीं सदी में महारानी बायजाबाई शिंदे ने कराया था, इस क्षेत्र का मुख्य धार्मिक केंद्र है.

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गोपाल मंदिर का मूल और ऐतिहासिक गर्भगृह पूरी तरह सुरक्षित है. केवल मंदिर के आसपास के पहुंच मार्गों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सड़क सीमा में आने वाले बाहरी अस्थायी अतिक्रमणों को एलाइनमेंट के तहत हटाया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही बिना किसी बाधा के हो सके.

सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन में चल रहे मार्ग चौड़ीकरण के बीच छत्रीचौक के समीप स्थित खड़े हनुमान मंदिर की मूर्ति को लेकर स्थिति अब प्रशासनिक फैसले से आगे नहीं बढ़ पाई है. मंदिर का स्ट्रक्चर तोड़े जाने के बावजूद खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को खबर लिखे जाने तक नए स्थल पर नहीं ले जाया जा सका. लोग आस्था का हवाला देकर इसका विरोध कर रहे हैं.

शाही मस्जिद और हाईकोर्ट का निर्णय

कंठाल चौराहे के पास स्थित ऐतिहासिक शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा सड़क के 15 मीटर चौड़ीकरण की सीमा में आ रहा था. नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर, पुलिस प्रशासन, शहर काजी और मस्जिद कमेटी के बीच कई दौर की बैठकों के बाद एक सौहार्दपूर्ण समझौता हुआ. समझौते के अनुसार, मस्जिद का सड़क सीमा में आने वाला लगभग 3.5 फीट का अग्रिम हिस्सा और मीनार का हिस्सा हटाया.

मस्जिद तोड़े जाने की आशंका को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इन्दौर पीठ) ने मामले को निस्तारित कर दिया. अदालत ने जिला प्रशासन और मुस्लिम समाज/मस्तीज कमेटी के बीच हुए आपसी लिखित समझौते को मान्य ठहराया.

27-28 सितंबर के दौरान क्षेत्र में अफवाहों और सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारियों के कारण अल्पकालिक तनाव की स्थिति बनी थी, जिसे देखते हुए एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात किया गया. इसके बाद शहर काजी और मस्जिद कमेटी ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि वे सिंहस्थ विकास कार्यों में पूर्ण सहयोग कर रहे हैं और तय समझौते के तहत निर्धारित हिस्सा हटाने पर सहमत हैं.

सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में हो रहा यह विकास कार्य सर्वसमावेशी नीति के तहत किया जा रहा है। इसमें किसी एक समुदाय या स्थल को लक्षित न करते हुए पक्षपातमुक्त कार्रवाई की जा रही है, जिसका प्रमाण यह है कि आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के निजी निर्माण भी एलाइनमेंट में हटाए गए हैं. धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखते हुए मंदिरों के विग्रहों को विधिवत पूजन के बाद स्थानांतरित किया जा रहा है, वहीं मस्जिदों/मजारों के मामले में सहमति से री-एलाइनमेंट किया जा रहा है ताकि प्राचीन नगरी उज्जैन का धार्मिक स्वरूप भी सुरक्षित रहे और आगामी महाकुंभ का आयोजन भी सुगम हो सके.



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