
हिमाचल प्रदेश के मंडी में ‘दिशा’ (DISHA) समिति की बैठक के दौरान सांसद कंगना रनौत द्वारा अधिकारियों को फटकार लगाने का मामला चर्चा का विषय बन गया है. अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने मंडी सांसद कंगना रनौत के दिशा बैठक में अधिकारियों के प्रति कथित व्यवहार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा कि कंगना को इस तरह अपना आपा नहीं खोना चाहिए था. नरेश चौहान ने कहा कि बैठक के दौरान कंगना रनौत ने आपा खो दिया और जिस भाषा का प्रयोग किया, वह उचित नहीं था. सांसद होने के नाते उन्हें मर्यादा का पालन करना चाहिए था.
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नरेश चौहान ने क्या कहा?
नरेश चौहान ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों के साथ योजनावार चर्चा कर समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कंगना रनौत का यह व्यवहार केवल पब्लिसिटी स्टंट था और इससे उनकी निराशा झलकती है. चौहान ने कहा कि यदि कोई परिस्थितियां बनी थीं तो उन पर भी विचार होना चाहिए.
दरअसल, कंगना ने 5 सितंबर को दिशा बैठक में अधिकारियों के कामकाज की रिपोर्ट पर भड़क गईं थीं. सांसद कंगना ने लंबित विकास कार्यों में तेजी लाने और खर्च की एक विस्तृत परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार करने के भी निर्देश दिए थे.
चंदे के मुद्दे को बताया गंभीर विषय
राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के मुद्दे पर नरेश चौहान ने कहा कि गैर-पंजीकृत पार्टियों के पास करोड़ों रुपये की डोनेशन पहुंचना गंभीर विषय है. उन्होंने कहा कि जिन दलों का राजनीतिक अस्तित्व नहीं है, उनके खातों में भी करोड़ों रुपये की राशि आ रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए.
उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” जैसे दावे किए गए थे, लेकिन अब कई बातें सामने आ रही हैं. चौहान ने कहा कि जिस पार्टी के पास वर्ष 2014 में 100 करोड़ रुपये भी नहीं थे, आज उसके पास 10 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति बताई जा रही है, इसलिए चंदे के स्रोतों की पारदर्शी जांच आवश्यक है.
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