
कर्नल सोफिया कुरैशी पर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह की टिप्पणी के बाद इस पर राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने की मांग की है. कांग्रेस ने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में बुधवार (26 अगस्त) को मंत्री विजय शाह के खिलाफ मोहन यादव सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है.
मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे एक पत्र में कहा कि राज्य सरकार द्वारा विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने का निर्णय एक ‘बड़बोले मंत्री’ को राजनीतिक संरक्षण देने के साथ उस व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है, जिसमें सत्ता अपने राजनीतिक व्यक्ति को जवाबदेही से बचाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया के सामने दीवार बनकर खड़ी हो रही है.
क्या सत्ता में बैठे लोग कानून से ऊपर हैं- जीतू पटवारी
उन्होंने कहा, ‘‘सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अभियोजन की स्वीकृति की मांग की है. ऐसे में सरकार का रुख देश के सामने एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है कि क्या सत्ता में बैठे व्यक्ति कानून से ऊपर हैं.’’
MP के राजनीतिक इतिहास का शर्मनाक अध्याय- जीतू पटवारी
पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में ये भी कहा कि मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास का यह एक ‘अत्यंत शर्मनाक अध्याय’ है, जहां सवाल अब केवल विजय शाह के आचरण का नहीं, मुख्यमंत्री और पूरे मंत्रिमंडल की संवैधानिक एवं नैतिक जवाबदेही का है. उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री सहित अब पूरे मंत्रिमंडल को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए.’’
राष्ट्रपति से तुरंत दखल देने का आग्रह
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि राष्ट्रपति सेना और संविधान की सर्वोच्च संरक्षक हैं और देश की जनता उनसे अपेक्षा करती है कि संविधान की मर्यादा, न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और भारतीय सेना के सम्मान की रक्षा के लिए वह अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करेंगी. उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति से तत्काल दखल का अनुरोध करते हुए उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस पूरे प्रकरण पर देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे तथा किसी भी राजनीतिक प्रभाव को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने देंगे.
एमपी कैबिनेट की बैठक के बाद जीतू पटवारी ने लिखी चिट्ठी
ज्ञात हो कि शाह से जुड़ा यह पूरा मामला मई 2025 का है जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर के आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी. इस ऑपरेशन की जानकारी मीडिया को देने वाली सैन्य अधिकारियों की टीम में कर्नल सोफिया कुरैशी भी शामिल थीं. पटवारी ने यह पत्र मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के एक दिन बाद लिखा, जिसमें आदिम जाति कल्याण मंत्री शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं आया.
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को दिए थे निर्देश
मंत्रिमंडल के बाद हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह से इस विषय में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव मंत्रिमंडल में नहीं आया. बाद में मीडिया से बातचीत में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने भी इसकी पुष्टि की. उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो सप्ताह के भीतर शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में अभियोजन की स्वीकृति पर निर्णय ले.
सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 31 अगस्त को होने वाली है. ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि मंत्रिमंडल की मंगलवार की बैठक में सरकार इस संबंध में कोई निर्णय ले सकती है. लेकिन सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने ही पुष्टि की कि इस संबंध में कोई प्रस्ताव मंत्रिमंडल में नहीं आया.
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने टिप्पणी पर लिया था संज्ञान
शाह ने इंदौर के निकट महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में कुरैशी को लेकर ऐसी टिप्पणी की थी, जिसे उनके धर्म और पहलगाम हमले के आतंकियों के समुदाय से जोड़कर देखा गया. मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी टिप्पणी का स्वत: संज्ञान लिया और शाह की टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक मानते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया. इसके बाद शाह ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
जांच के लिए एसआईटी का किया गया था गठन
शीर्ष अदालत ने शाह के बयानों की निंदा करते हुए इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी की रिपोर्ट अदालत के सामने प्रस्तुत होने के बाद उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वह शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में अभियोजन की स्वीकृति पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अदालत द्वारा गठित एसआईटी अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुका है, लेकिन राज्य सरकार की स्वीकृति का इंतजार है. अदालत ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए यह मंजूरी आवश्यक है. धारा 196 सांप्रदायिक वैमनस्य और घृणा को बढ़ावा देने से संबंधित है.
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